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धार्मिक एवं सेवार्थ चैरिटेबल ट्रस्टों के नवीनीकरण को लेकर सुझाव

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
राजस्थान टैक्स कंसलटेंट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष सीए ओम बांठिया ने आयकर अधिनियम के अंतर्गत धार्मिक एवं सेवार्थ चैरिटेबल ट्रस्टों के नवीनीकरण को लेकर भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं।
बांठिया ने भारत सरकार की वित्त मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं राज्य की वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि ट्रस्ट व संस्थाओं के पंजीयन के लिए राजस्थान में देवस्थान विभाग अथवा सोसाइटी एक्ट दोनों में से किसी एक में पंजीयन को मान्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कई संस्थान, समितियां, गौशालाएं एवं सेवा कार्य करने वाले ट्रस्ट सोसाइटी एक्ट में पंजीकृत हैं, लेकिन देवस्थान विभाग में अलग से पंजीयन की अनिवार्यता उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट एक्ट एक ही है, जबकि राजस्थान में दो विभाग होने के कारण संस्थानों को अतिरिक्त पंजीयन करवाना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय से सेवा कार्य कर रही संस्थाओं पर नया बोझ नहीं डाला जाए और आयकर अधिनियम की धारा 12ए एवं 80जी के लिए दोनों में से किसी एक पंजीकरण को मान्यता प्रदान की जाए।
बांठिया ने यह भी सुझाव दिया कि पुराने ट्रस्ट जिनका पंजीयन 31 मार्च 2026 को पूर्ण हो रहा है, उनके नवीनीकरण हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 की जाए, ताकि आयकर विवरणी दाखिल करने के बाद नवीनीकरण की प्रक्रिया सुगमता से की जा सके।
उन्होंने कहा कि राजस्थान टैक्स कंसलटेंट संगठन सहित कई संस्थान पहले भी यह मांग उठा चुके हैं, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।

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