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बालोतरा में साध्वी श्री शुद्धांजनाश्रीजी ने दिया पर्युषण महापर्व का संदेश

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

बालोतरा, 18 अगस्त।

नाहटा खरतरगच्छ भवन में आयोजित लघु शांति तप के तपस्वियों के अभिनंदन समारोह में साध्वी श्री शुद्धांजनाश्रीजी ने कहा कि जीवन की दहलीज पर धर्म की रंगोली पर्युषण महापर्व है। पर्युषण क्षमा धर्म की साधना है और क्षमा ही वह तत्व है जो दो टूटे दिलों को जोड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अहिंसा जैन धर्म का प्रथम नारा है, जो प्राणों से प्यार का संदेश देता है। आगामी 20 से 27 अगस्त तक महापर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आराधना होगी, जिसमें सभी तपस्वियों को अट्ठाई तप करना है। तप साधना से जीवन में निखार आता है और आत्मा निर्मल बनती है।

साध्वीश्री ने भगवान महावीर के दिग्दर्शन को अलौकिक बताते हुए कहा कि धर्म और विज्ञान दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। धर्म बिना का विज्ञान अंडा है और विज्ञान बिना का धर्म पंगु है। जहां दोनों का सद्भाव है वहां विकास होगा और जहां अभाव है वहां विनाश।

इस अवसर पर साध्वी प्रमुदिताश्रीजी ने कहा कि चातुर्मास के दौरान पर्युषण महापर्व में हमें अपने आचार-विचार पर गहन मनन करना चाहिए और प्रवृत्तियों में जिनाज्ञा की सुगंध भरनी चाहिए।

समारोह में एक सौ पचास से अधिक लघु शांति तप के तपस्वियों का लाभार्थी परिवारों द्वारा तिलक, माला, शाल, श्रीफल एवं भेंट प्रदान कर अभिनंदन किया गया। लाभार्थी परिवारों में संपतराज हुलासचंद चोपड़ा, संतोकचंद माणकचंद चोपड़ा, मूलचंद प्रवीण कुमार संकलेचा, श्रीमती हाऊ देवी घेवर चंद बोकड़िया एवं जनकराज प्रवीण कुमार चोपड़ा परिवार शामिल रहे।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

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