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एनआरसीसी वैज्ञानिकों ने गुजरात में उष्‍ट्र दुग्‍ध उद्यमिता को लेकर संगोष्‍ठी के साथ फील्‍ड क्षेत्रों का किया दौरा

ब्यूरो चीफ डॉ. राम दयाल भाटी बीकानेर

बीकानेर 11 मार्च 2024 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसन्‍धान केन्‍द्र के वैज्ञानिकों ने 9 और 10 मार्च को गुजरात (भुज) में फील्‍ड क्षेत्रों विजिट के दौरान घड़सीसा में उष्‍ट्र पालकों से उनके द्वार जाकर बातचीत की तथा अमूल द्वारा विकसित उष्ट्र दूध डेरी का दौरा किया । वहीं भुज में ही अमूल द्वारा एनआरसीसी आदि के साथ उष्‍ट्र दुग्‍ध उद्यमिता संबंधी आयोजित संगोष्‍ठी में उष्‍ट्र संबंध सभी पशुपालन विभाग, चिकित्‍सक, संबंधित समुदाय, घूमन्तू पशुओं से जुडी सहजीवन संस्था कामधेनु विश्व विद्यालय, सरहद डेरी, अमूल, इत्यादि के प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।

केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने संगोष्‍ठी व अलग-अलग अवसरों के दौरान कहा कि ऊँटनी के दूध में विद्यमान औषधीय गुणधर्मों को ध्‍यान में रखते हुए इस प्रजाति को दुग्‍ध व्‍यवसाय के रूप में बढ़ावा दिए जाने की महत्‍ती आवश्‍यकता है ताकि दूध को पुख्‍ता तौर पर उद्यमिता से जोड़ते हुए देशभर में आवश्यकता अनुसार उपभोक्‍ताओं की मांग को पूरा किया जा सकें। डॉ. साहू ने बताया कि गुजरात की अमूल संस्‍था द्वारा उष्‍ट्र ‘ दुग्‍ध संग्रहण बूथ’ संचालित किया जा रहा है जहां प्रतिदिन लगभग 1500 लीटर दूध, दुग्‍ध व्‍यवसायकों द्वारा पहुंचाया जाता है वहीं इसके अलग अलग बूथों में 4000-5000 लीटर दूध प्रतिदिन एकत्रित किया जाता है। उन्‍होंने ऊँटनी के दूध की मांग को देखते हुए गुजरात सरकार द्वारा उष्‍ट्र पालन व्‍यवसाय को बढ़ावा देने हेतु किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की वहीं इनमें गैर सरकारी संगठनों की अहम भूमिका को भी सराहा तथा कहा कि यदि राजस्‍थान में भी उष्‍ट्र दुग्‍ध व्‍यवसाय हेतु सभी इसी भांति आगे आए तो प्रदेश में ऊँटनी के दूध की लहर आ सकती है ।

डॉ. साहू ने ऊँटनी के दूध को लेकर एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी देते हुए आहार व चरागाह विकास, नस्‍ल सुधार, उत्‍पादकता वृद्धि, ऊंटनी के दूध की गुणवत्ता में सुधार और आवश्यक औषधीय आवश्यकताओं के लिए प्रसंस्करण पर अनुप्रयोग अनुसंधान में अमूल उद्यम को सहयोग देने की बात कही, इन्‍हीं निहित उद्देश्‍यों के अंतर्गत ऊंटनी के दूध की उपयोगिता बढ़ाने और इसे जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए एनआरसीसी, अमूल और कामधेनु विश्‍वविद्यालय के बीच त्रिपक्षीय एमओयू किया जाएगा।

इस दौरें में शामिल केन्‍द्र के डॉ. आर. के. सावल, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी टी.एस.पी. ने बताया कि इस दौरान जनजातीय समुदायों से उष्‍ट्र पालन व्‍यवसाय एवं इससे प्राप्‍त होने वाली आमदनी के बारे में भी खास चर्चा की गई वहीं फकीरानी जाट व ऊँटों की खराई नस्ल पाए जाने वाले क्षेत्रों का भी दौरा किया गया । उन्‍होंने कहा कि कच्छ के रण से पौधे के 17 नमूने व ऊँटों के चराई व्यवहार का भी अवलोकन करते हुए इन चराई क्षेत्रों को और सुदृढ़ करने हेतु प्रेरित किया गया ताकि बढ़ते पशुओं की संख्या के लिये आवश्यकता वृक्षों एवं झाड़ियों के माध्यम से खाद्य स्रोत्रों की मांग पूरा किया जा सकें। इस दौरान केन्‍द्र के वैज्ञानिक डॉ. मितुल द्वारा सर्वे के दौरान विभिन्‍न गतिविधियों में सहयोग प्रदान किया गया साथ ही फील्‍ड क्षेत्र से दूध के 8 नमूने एकत्रित किए गए जिन पर एनआरसीसी में अध्‍ययन किया जाएगा ।

Viyasmani Tripaathi

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