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शारदीय नवरात्रा की पावन सप्तमी पर नागाणा स्थित कुलदेवी श्री नागणेच्या माता के दरबार में रावल किशन सिंह जसोल एवं कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने की विशेष पूजा-अर्चना

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

शारदीय नवरात्रा की पावन सप्तमी पर नागाणा स्थित कुलदेवी श्री नागणेच्या माता के दरबार में रावल किशन सिंह जसोल एवं कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने की विशेष पूजा-अर्चना

पूज्य महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज के पावन सान्निध्य में पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं विधि-विधान से किए दर्शन, समस्त भक्तों एवं क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना

पालिया में माँ नागणेच्या के मूल स्वरूप माँ चक्रेश्वरी के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर, वर्ष 2027 में आयोजित होगा भव्य, दिव्य एवं ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

नागाणा, 17 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रा की पावन सप्तमी के अवसर पर श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर, जसोल के पूज्य महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के अध्यक्ष एवं माँ नागणेच्या माता ट्रस्ट, नागाणा के उपाध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल तथा कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने नागाणा स्थित अपनी आराध्य कुलदेवी श्री नागणेच्या माता के मंदिर पहुँचकर दर्शन एवं विशेष पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं विधि-विधान के साथ माँ के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर समस्त भक्तों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की गई।

इस दौरान कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने नागाणा मंदिर परिसर में निर्माणाधीन श्री राजपूत विश्राम गृह का अवलोकन कर निर्माण कार्यों की प्रगति एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। साथ ही राजपूत समाज से इस पुण्य कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कुलदेवी की आराधना हमारी आस्था एवं गौरवशाली कुलपरंपरा का अभिन्न अंग – रावल किशन सिंह जसोल

इस अवसर पर रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि माँ नागणेच्या हमारी आराध्य कुलदेवी हैं। उनके प्रति अटूट श्रद्धा एवं विश्वास पीढ़ियों से चली आ रही हमारी गौरवशाली कुलपरंपरा का अभिन्न अंग है। कुलदेवी की आराधना हमें पूर्वजों के आदर्शों, धार्मिक संस्कारों एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़े रखने के साथ जीवन में धर्मनिष्ठा, कर्तव्यबोध एवं सदाचार की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्रा की सप्तमी तिथि आदिशक्ति माँ दुर्गा के सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि की उपासना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर कुलदेवी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त होना विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। माँ की असीम कृपा से समाज में प्रेम, सद्भाव एवं एकता बनी रहे तथा भावी पीढ़ियाँ अपनी गौरवशाली परंपराओं एवं संस्कारों के प्रति सदैव समर्पित रहें, यही हमारी प्रार्थना है।

कर्नाटक से लाई गई माँ चक्रेश्वरी की पावन ज्योत पालिया में स्थापित, वर्ष 2027 में होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव – सचिव सुमेर सिंह वरिया

श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के सचिव सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि कुलपरंपरा के अनुसार श्री नागणेच्या माता का मूल स्वरूप माँ चक्रेश्वरी है। माँ चक्रेश्वरी की पावन ज्योत को संस्थान के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल द्वारा पूज्य श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज एवं पूज्य महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज के पावन सान्निध्य में कर्नाटक राज्य के हासन जिले के मर्कुली गाँव से विधि-विधानपूर्वक लाकर पालिया स्थित श्री राणी रूपादे जी मंदिर में स्थापित किया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में श्रद्धालु पालिया मंदिर पहुँचकर माँ चक्रेश्वरी की पावन ज्योत के दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसी परिसर में माँ चक्रेश्वरी के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माण पूर्ण होने के पश्चात वर्ष 2027 में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (भादवा बीज) के शुभ अवसर पर भव्य, दिव्य एवं ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पावन ज्योत को नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान के साथ प्रतिष्ठित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि माँ चक्रेश्वरी के मंदिर का निर्माण कुलदेवी की प्राचीन आराधना परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। इस मंदिर के निर्माण से पालिया में श्रद्धालुओं को माँ चक्रेश्वरी की आराधना के लिए एक भव्य एवं स्थायी धार्मिक स्थल प्राप्त होगा। आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की सहभागिता इस पावन आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान करेगी।

माँ चक्रेश्वरी का भव्य मंदिर संपूर्ण राठौड़ वंश एवं उससे उद्भूत विभिन्न वंशीय शाखाओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देगा नई पहचान – कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल

कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि राठौड़ वंश की आराध्य कुलदेवी माँ नागणेच्या के मूल स्वरूप माँ चक्रेश्वरी का पालिया में निर्माणाधीन भव्य मंदिर हमारे गौरवशाली इतिहास, पूर्वजों की आस्था एवं प्राचीन कुलपरंपराओं का प्रतीक बनेगा। इस मंदिर के माध्यम से कुलदेवी की आराधना की ऐतिहासिक परंपरा को संरक्षित करने तथा भावी पीढ़ियों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य होगा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाला प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव संपूर्ण राठौड़ वंश एवं उससे उद्भूत विभिन्न वंशीय शाखाओं के परिवारों के लिए विशेष गौरव का अवसर होगा। देश के विभिन्न राज्यों में निवास करने वाले इन परिवारों को अपनी आराध्य कुलदेवी के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करने तथा अपने पूर्वजों की गौरवशाली परंपराओं के प्रति आस्था प्रकट करने का अवसर प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि इस महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य कुलदेवी की प्राचीन उपासना परंपरा को व्यापक स्वरूप प्रदान करना, राठौड़ वंश एवं उससे उद्भूत विभिन्न वंशीय शाखाओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना तथा भावी पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास, कुलपरंपराओं एवं सनातन संस्कृति के आदर्शों से परिचित कराना है। पूर्वजों से प्राप्त इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखना एवं आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में संपूर्ण राठौड़ वंश एवं उससे उद्भूत विभिन्न वंशीय शाखाओं के परिवारों के साथ छत्तीस कौम को भी सादर आमंत्रित कर उनकी व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। इस पावन आयोजन में सभी समाजों की सहभागिता से धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव एवं सांस्कृतिक एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर प्राप्त होगा। संपूर्ण समाज के सामूहिक सहयोग एवं श्रद्धाभाव से यह महोत्सव मालाणी क्षेत्र की गौरवशाली धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में स्थापित होगा।

उन्होंने माँ नागणेच्या एवं माँ चक्रेश्वरी के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हुए समस्त श्रद्धालुओं, सर्व समाजबंधुओं एवं क्षेत्रवासियों के मंगलमय जीवन, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं सर्वांगीण उन्नति की कामना की।

नवरात्रा की सप्तमी शक्ति, साहस एवं आध्यात्मिक चेतना का पावन दिवस – महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज

पूज्य महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज ने शारदीय नवरात्रा की सप्तमी तिथि के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा के सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि की विशेष उपासना की जाती है। माँ कालरात्रि शक्ति, साहस एवं निर्भयता की प्रतीक हैं। उनकी आराधना भक्तों को भय, संकट एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त होकर सत्य, धर्म एवं सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में कुलदेवी की आराधना का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है। कुलदेवी के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण परिवारों में धार्मिक संस्कारों, सदाचार, कर्तव्यबोध एवं धर्मनिष्ठा की भावना को सुदृढ़ करते हैं। नवरात्रा का पावन पर्व हमें आत्मशुद्धि, संयम, साधना, सेवा एवं परोपकार के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है।

पालिया में निर्माणाधीन माँ चक्रेश्वरी के भव्य मंदिर एवं आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का निर्माण एवं संरक्षण हमारी सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपरा रही है। ऐसे पवित्र कार्यों में सर्व समाज की सामूहिक सहभागिता से धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा और अधिक सुदृढ़ होती है। माँ चक्रेश्वरी का यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए कुलदेवी की उपासना, धार्मिक संस्कारों एवं आध्यात्मिक प्रेरणा का महत्त्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

इस अवसर पर माँ नागणेच्या के पावन दरबार में समस्त प्राणिमात्र के कल्याण, विश्वशांति, सामाजिक सद्भाव, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संपूर्ण क्षेत्र की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

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