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नवरात्रि में प्राकृतिक चिकित्सा का विशेष महत्व, योग और सात्त्विक आहार से संवरेगा स्वास्थ्य

उपवास, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाकर शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने का संदेश

बस्ती से वेदान्त सिंह

बस्ती (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, संयम और साधना का प्रतीक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा, योग, प्राणायाम तथा सात्त्विक आहार का विशेष महत्व है। प्राकृतिक चिकित्सा की जीवनशैली व्यक्ति को प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने, खानपान में अनुशासन रखने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने की प्रेरणा देती है।

प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह, निदेशक, आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, बस्ती के अनुसार, नवरात्रि के दौरान उपवास रखने वाले लोगों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। फल, मौसमी सब्जियां, पर्याप्त पानी और सुपाच्य भोजन शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं। उपवास का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि संयम और संतुलित जीवनशैली को अपनाना होना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने तथा अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।

योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन

डॉ. नवीन सिंह के अनुसार, नवरात्रि में सुबह के समय योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास दिनचर्या को सकारात्मक बनाने में सहायक हो सकता है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और ध्यान जैसी तकनीकें तनाव कम करने, मन को शांत रखने तथा एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इसके साथ ही नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का अवसर

प्राकृतिक चिकित्सा में स्वच्छ वायु, पर्याप्त जल, उचित विश्राम, सूर्य के प्रकाश और संतुलित आहार को स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। नवरात्रि के दौरान इन आदतों को अपनाकर व्यक्ति अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। सात्त्विक भोजन के साथ सकारात्मक विचार, क्रोध पर नियंत्रण और मानसिक शांति का अभ्यास भी इस पर्व की आध्यात्मिक भावना के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि मधुमेह, गुर्दे की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं तथा नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा और योग स्वस्थ जीवनशैली के पूरक हैं, लेकिन इन्हें किसी गंभीर बीमारी के प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

नवरात्रि का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। यदि इन नौ दिनों में अपनाई गई अच्छी आदतों को वर्षभर दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

संदेश: नवरात्रि में शक्ति की उपासना के साथ स्वास्थ्य की साधना करें, योग और सात्त्विक आहार अपनाएं तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लें।

प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह

निदेशक, आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, बस्ती

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

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