बालोतराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
दम्पति कार्यशाला का समायोजन
हैप्पी कपल हो तो होगी खुशी डबल-- प्रोफेसर साध्वी डॉ.मंगलप्रज्ञा

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
तेरापंथ भवन बालोतरा के विशाल अमृत सभागार में समायोजित “हैप्पी कपल खुशी डबल” विषयक कार्यशाला में संभागी दम्पतियों को प्रेरणा प्रदान करते हुए प्रोफेसर साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने कहा-पति-पत्नी परिवार रुपी रथ के सशक्त पहिए हैं समाज का व्यक्ति स्वस्थ संस्कारित होता है तो समाज भी स्वस्थ रह सकता है। परिवार की आधारशिला दम्पति को माना गया है। अग्रिम रिश्तों का प्रारंभ विस्तार यहीं से होता है। सप्ताह में रविवार आदि सात वार होते हैं- ये सातों तभी स्वस्थ और समृद्ध रह सकते हैं जब आठवें परिवार रुपी वार को सुरक्षित रखा
जाए।
परिवार के चिन्तनशील दम्पति अपनी पिछली पीढी और अग्रिम पीढ़ी के प्रति सजग रहते हुए वर्तमानिक सदस्यों का भी सरंक्षण कर सकते हैं। आवश्यकता हे दाम्पत्य जीवन खुशहाल हो। पारस्परिक स्नेह भाव बढता रहे। सहयोग, सामञ्जस्य, सहिष्णुता के सूत्रों को जीवन का आधार मानकर चलने वाले युगल दुसरों के लिए आदर्श बन सकते हैं। सुखी दाम्पत्य की पहली शर्त है – एक दूसरे की भावना का सम्मान किया जाए, कुछ बातों को अपने अंदाज से कहे और कुछ ऐसी परिस्थिति बनती हैं जिन्हें नजरंदाज भी करना चाहिए
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने कहा- भारतीय संस्कृति परम्परा की कदर करनी चाहिए। रिश्ते आग्रह से नहीं आदर से चलते हैं। पारस्परिक विचारों का भेद हो सकता है पर,मनभेद न हो। रिश्तों को जोड़ना मुश्किल है पर तोड़ना आसान है। दाम्पत्य जीवन धैर्य और गांभीर्य गुण की सुवास होनी चाहिए। पति-पत्नी का रिश्ता आदर्श होता है, उनकी सोच व्यवहार का असर उनकी संतानों पर पड़ता है, इसलिए जागरुकता की अपेक्षा है। साध्वी श्री ने भक्तामर का रिद्धि मंत्रों के साथ अनुष्ठान करवाया इस अवसर पर साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी राजुल प्रभा, साध्वी चैतन्य प्रभा और साध्वी शौर्य प्रभा ने सामूहिक संगान के द्वारा अनेक जीवन सूत्रों का उपहार दिया। साध्वी चैतन्य प्रभा, राजुल प्रभा एवं शोर्य प्रभा ने प्रेरक एक्टिविटिज पेश की। साध्वी राजुलप्रभा ने कहा खुशहाल जिंदगी के लिए अनुशासन का पेरामीटर होना आवश्यक है।
इस अवसर पर तात्कालिक आयोजित
प्रतियोगिता में 11बारह व्रतधारी जोड़े एवं 10 जैनविद्या अध्ययनरत जोड़ों को तेरापंथ सभा द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही पांच जोड़ो को खड़ा कर उनके जीवन में एक दूसरे के प्रति कैसा विश्वास होता हे उसके मुखारवृन्द से चुना तो कहा गया “में सूरज वो मेरी किरण”,”में चांद वो मेरे तारे”,”में आँख वो मेरे पलक”,”में मोबाइल वो मेरी चार्जर”,”में सागर वो मेरी लहर” आदि ऐसे एक दूसरे के प्रति समन्वय,प्रेम के भाव रखते हुए अपने जीवन को आगे बढ़ा रहे ऐसा कहा।
साध्वी सुदर्शनप्रभाजी ने कार्यक्रम का संचालन किया

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