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जैविक घड़ी के अनुरूप दिनचर्या अपनाकर बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ें
समय पर जागना, संतुलित भोजन, नियमित योग-प्राणायाम और पर्याप्त नींद स्वस्थ जीवनशैली की कुंजी : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। शरीर की अपनी एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जो नींद-जागरण, भोजन, पाचन, हार्मोनल गतिविधियों और दैनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। यदि दिनचर्या को नियमित रखते हुए शरीर की प्राकृतिक लय के अनुरूप जीवनशैली अपनाई जाए तो स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यह बात संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट एवं आस्था आयुर्वेदिक हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, कटेश्वर पार्क, गांधी नगर-बस्ती के निदेशक प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने कही।
उन्होंने बताया कि प्रातःकाल का समय योग, प्राणायाम, ध्यान और खुली हवा में भ्रमण के लिए उपयोगी माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर नियमित दिनचर्या शुरू करने से व्यक्ति को दिनभर सक्रिय रहने में सहायता मिलती है। गहरी एवं सहज श्वास के अभ्यास से श्वसन क्षमता और मानसिक एकाग्रता को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।
डॉ. सिंह के अनुसार, भोजन हमेशा भूख और शरीर की आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए। नियमित समय पर संतुलित एवं सुपाच्य भोजन लेना, पर्याप्त पानी पीना तथा अत्यधिक तला-भुना और देर रात का भोजन कम करना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजन के बाद थोड़ी देर आराम या हल्की चहलकदमी करना भी उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि शाम के समय हल्का भोजन करना और रात में समय पर सोने की आदत शरीर की प्राकृतिक नींद-जागरण लय को बनाए रखने में सहायक है। देर रात तक मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और अंधेरे, शांत वातावरण में पर्याप्त नींद लेना बेहतर माना जाता है।
उन्होंने बताया कि रात्रि में शरीर को पर्याप्त विश्राम देना आवश्यक है। लगातार देर रात तक जागने की आदत से अगले दिन थकान, एकाग्रता में कमी और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषकर वाहन चलाते समय पर्याप्त नींद लेना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि आयुर्वेद में दिनचर्या और ऋतुचर्या को स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वहीं आधुनिक विज्ञान भी शरीर की सर्केडियन रिद्म यानी जैविक घड़ी के महत्व को स्वीकार करता है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति की दिनचर्या उसकी उम्र, कार्यप्रकृति, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अलग हो सकती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वस्थ रहने के लिए नियमित योग-प्राणायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, स्वच्छ वातावरण और सकारात्मक जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों में निरंतरता लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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