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संस्कारों के संरक्षण का प्रेरणादायक आयोजन—वैदिक यज्ञ के साथ मनाई गई वैवाहिक जीवन की 25वीं वर्षगांठ

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
भिवाड़ी। आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक संस्कार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, वहीं समाजसेवी डॉ. ग्याशी राम गुप्ता द्वारा भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। गायत्री परिवार के सानिध्य में कजरिया ग्रीन में राजेंद्र गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी उर्मिला गुप्ता की वैवाहिक जीवन की 25वीं वर्षगांठ बड़े ही आध्यात्मिक और संस्कारमय वातावरण में मनाई गई।
इस अवसर पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य हरिराम जी ने विधि-विधानपूर्वक मंत्रोच्चारण कर यज्ञ संपन्न कराया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने व्याख्यान में भारतीय संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों एवं वैवाहिक जीवन की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों को संस्कारों के महत्व से अवगत कराया।
आचार्य जी ने कहा कि “भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि सात जन्मों का पवित्र संस्कार माना गया है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को हमारी परंपराओं से जोड़ने और परिवारों में संस्कारों को जीवित रखने का कार्य करते हैं।”
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने राजेंद्र गुप्ता एवं उर्मिला गुप्ता पर पुष्प वर्षा कर मंगल गीतों के साथ उन्हें शुभकामनाएं दीं। पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता, पारिवारिक एकता और भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस अवसर पर सी. पी पारीक जी, नवीन नवनीत गुप्ता, उनकी धर्मपत्नी नीलम गुप्ता, पुत्रवधू, बहन निशा गुप्ता, दामाद कैलाश गुप्ता सहित परिवार एवं समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. ग्याशी राम गुप्ता ने कहा कि “हमारे संस्कार ही हमारी पहचान हैं। यदि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति का सही ज्ञान देना है, तो ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है।”
यह आयोजन केवल एक वर्षगांठ समारोह नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और वैदिक परंपराओं को जीवित रखने का एक सुंदर प्रयास बनकर सामने आया।

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