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विधि-विधान से हुआ श्री हीरानंदजी- देवसीदासजी मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव

हजारों की संख्या में पहुंचे लोग, डॉ. कन्हैयालाल कच्छावा ने किया पूर्वजों को नमन, नशा मुक्ति और देश में अमन-चैन कि कामना की

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर । सुजानदेसर स्थित बाबा रामदेवजी मंदिर और आसपास का संपूर्ण क्षेत्र रविवार २६ अप्रेल को धर्म, अध्यात्म और आस्थाओं से परिपूर्ण रहा। जहां लोक देवता बाबा रामदेवजी के अनन्य भक्त, नशा मुक्ति के प्रबल विरोधी और सामाजिक समरसता के प्रेरणास्त्रोत श्री हीरानंद जी -देवसीदास जी और उनके गुरु गोरधनदास जी की के संगमरमर पत्थर से नव निर्मित मंदिर एवं मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हर्षोल्लास और धार्मिक क्रियाकलापों के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं नवनिर्मित मंदिर का हजारों की संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु महिलाओं व पुरुषों की मौजूदगी में कच्छावा परिवार द्वारा महोत्सव मनाया गया।

विधि-विधान के साथ संपन्न हुए कार्यक्रम में सनातन धर्म की सभी विधाओं का प्रयोग कर अपने पूर्वजों को याद करते हुए कच्छावा परिवार के डॉ. कन्हैयालाल कच्छावा ने देश में अमन-चैन और शांति के साथ नशा मुक्ति की कामना को लेकर प्रार्थना की। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद धर्मप्रेमी बंधुओ ने बाबा रामदेवजी महाराज की जय, हीरानंदजी, देवसीदासजी और उनके गुरु गोरधनदास जी के जयकारों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात सभी धर्म प्रेमी बंधुओं ने महाप्रसादी का आनन्द लिया।कार्यक्रम में इस दौरान शहर के गणमान्यजनों में शामिल केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक जेठानन्द व्यास, शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़,बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के अध्यक्ष जुगल राठी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्य पुजारी इंजीनियर लोकेश कच्छावा, लालचन्द, हुकमचंद, किशन कुमार कच्छावा, प्रेम गहलोत, राजू कच्छावा, सुनील, रविशंकर कच्छावा, नेमीचंद गहलोत, तेजकरण, ओमप्रकाश, कैलाश कच्छावा आदि ने व्यवस्था में सहयोग दिया।

सजीव झांकी, शोभायात्रा ने मन मोहा

श्री हीरानंद जी- देवसीदास जी मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव से पूर्व नगर भ्रमण को निकली कलश यात्रा में कच्छावा परिवार सहित बंधु-बांधवों और कुटुंब समाज सहित ३६ कौम के लोगों ने जयकारों के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। यह यात्रा मंदिर परिसर से शुरु होकर संपूर्ण गांव की परिक्रमा करते हुए पुन: मंदिर स्थल पहुंची। कलश यात्रा में महिलाओं ने इकसार साड़ी पहन , सर पर कलश धारण कर यात्रा निकाली, वहीं पुरुषों ने सफेद चौला और पायजामा पहन सर पर पाग धारण करते हुए परम्परा का निर्वहन करते हुए शामिल हुए। इस दौरान सजे-धजे ऊंट, घोड़े और उन पर सवार बालक-बालिकाएं, बैंडबाजो की मधुर स्वर लहरियां, वाहनों का काफिला और जोश से भरे जयकारों की गूंज दूर तक सुनाई देती रही। वहीं जगह-जगह कलश यात्रा का पुष्प वर्षा से और शीतल पेय पदार्थों की मनवार से सेवा की गई। इस दौरान भगवान के सजीव झांकी भी आकर्षण का केन्द्र रही। संपूर्ण व्यवस्था में कच्छावा परिवार सहित मंदिर ट्रस्ट के गणमान्यजनों और धर्मप्रेमी बंधुओं का सहयोग रहा।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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