पंडित धीरेंद्र शास्त्री का लगा गुना मे दिव्य दरबार
राम के चरित्र को जियें तो होगा कल्याण

संवाददाता करण सिंह ठाकुर
गुना। जीवन में राम के चरित्र को जिन्होंने उतारा है उनका ही चरित्र निर्माण हुआ है रामचरित्र मानस का मतलब रामचरितमानस का उल्टा पढ़ो तो राम चरित्र मानस, मानस रामचरित्र होगा जिस मनुष्य का चरित्र राम की तरह होता है वही पूरी दुनिया में पूजा जाता है। गुना के दशहरा मैदान में पिछले 5 दिवस से चल रही श्रीराम कथा एवं श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन पर एक दिवसीय दिव्य दरबार मैं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि रामायण को तो हम सभी मानते हैं परंतु रामायण कि नहीं मानते, राम जी को तो मानते हैं रामजी की नहीं मानते, गुरुजी को तो मानते हैं गुरुजी कि नहीं मानते ,यही जिंदगी में घाटा है। जिसने भी जिंदगी में राम चरित्र मानस का आश्रय लिया है वह कभी फेल नहीं हुआ है। राम जी के जीवन से एक चीज सीखने की है राम रावण युद्ध के समय जब रावण कुंभकरण के पास गया तो कुंभकरण ने कहा हे रावण तुम चिंतित क्यों हो रावण ने कहा हमने जानकी का हरण कर लिया है तब कुंभकरण ने कहा तुमने उन पर अधिकार किया क्या। रावण ने का अधिकार तो दूर की बात वह हमारे तरफ देखती तक नहीं है। तो कुंभकरण ने कहा रावण तुम तो मायावी हो तुमने महात्मा बनकर जानकी जी का हरण कर लिया तुम राम रूपी परमात्मा बन कर उन पर अधिकार भी कर सकते हो। तब रावण ने कहा हमने जैसे ही राम का रूप रखा तो सीता माता के समान लगी अर्थात दूसरी नारी माता के समान लगी। यही राम का चरित्र है राम के चरित्र मैं जो आ जाता है उसे दूसरी नारी भी माता के समान लगती है। रामचरितमानस को पढ़िए, रामचरितमानस को पूजये, रामचरितमानस को गढ़िए , रामायण के आधार पर जीवन को जिए तो निश्चित रूप से आपकी जिंदगी में बदलाव होगा, हमारे समाज में भी बदलाव होगा , राष्ट्र में भी बदलाव होगा ,यही बदलाव से भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। आपने कहा कि गुना का पागलपन श्री राम की भक्ति के लिए बहुत अद्भुत है जो जोश राम की प्रीती मैं है यही जोश बरकरार रखना एक दिन आएगा भारत हिंदू राष्ट्र होगा। आपने कहा कि यह जीवन बार-बार नहीं मिलता है (स्ट्रेस) तनाव में भी क्या जीना है मुस्कुराते हुए जियो इसी का नाम जिंदगी है।

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