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हमारे परिधान और हमारे मुखड़े के गीत भी हमारे व्यक्तित्व का परिचय देते हैं -महेश शुक्ल

स्वामी दयानंद विद्यालय के वार्षिकोत्सव में जिलाधिकारी भी हुई शामिल, बच्चों को बताया सफलता के मंत्र

 

बस्ती 26फरवरी।

परिधान, साहित्य और मुखड़े के गीत हमारे व्यक्तित्व का परिचय देते हैं जैसा हम परिधान पहनते हैं जैसे गीत गुनगुनाते हैं और जैसे साहित्य पढ़ते हैं समाज के लोग हमारा आकलन उसी के अनुसार व्यक्तित्व वाला करते हैं। हमारे भारतीय संस्कृति में हर मौसम हर त्यौहार और हर मांगलिक आयोजन के गीत हुआ करते थे। गीत और परिधान हमारे साधना के साधन भी थे जिसे आज बच्चों ने कार्यक्रम के माध्यम से प्रस्तुत किया। मैं इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। उक्त बातें स्वामी दयानंद पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुर्तीहट्टा बस्ती में आयोजित वार्षिक उत्सव में बतौर अतिथि बोलते हुए राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त गौसेवा आयोग उत्तर प्रदेश सरकार के महेश शुक्ल ने कही। बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर प्रगति के लिए मौलिक अभिव्यक्त अति आवश्यक है जो सांस्कृतिक कार्यक्रमों से ही मिलती है। पढ़कर उच्च पदों को प्राप्त करना आसान है पर इन पदों के साथ मानवता व भाईचारे का गुण संस्कार युक्त शिक्षा से ही मिल सकता है। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण से महेश शुक्ल उपाध्यक्ष गौसेवा आयोग उत्तर प्रदेश और कृतिका ज्योत्सना जिलाधिकारी बस्ती द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ अपने संबोधन में जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने कहा कि वार्षिकोत्सव वर्ष भर में अर्जित ज्ञान, क्रिया और कौशल के प्रदर्शन का समय होता है। विद्यार्थी गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा का प्रदर्शन करके अन्यों को प्रेरणा भी देता है और अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर भी प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि सफलता अकेले नहीं आती वह अपने साथ सकारात्मक विचार, बड़ों का आशीर्वाद और समाज का सहयोग साथ लेकर आती है। इसे लेकर जब आप समाज में जाते हैं तो समाज का विश्वास जीत सकते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम से अपनी दैवीय सम्पदा को आप साझा करते हैं तो आप सबके लिए प्रेरणा बनकर उभरते हैं। इस अवसर पर प्रस्तुत कार्यक्रमों की सराहना करते हुए उन्होंने शिक्षकों के लिए आभार व्यक्त किया। कंचनलता और रजनी आर्य ने तिलक और ओम पट्टिका से जिलाधिकारी का सम्मान किया।अलख निरंजन और ओंकार आर्य ने महेश शुक्ल उपाध्यक्ष गौसेवा आयोग का तिलक और ओम पट्टिका से स्वागत किया। कार्यक्रम में कलाकार घनश्याम सनातन द्वारा लिखित वंदे मातरम, छुआछूत पर आधारित पंचायत नाटक की प्रस्तुति ने अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने अतिथियों और प्रबंधक ओम प्रकाश आर्य को वन्दे मातरम् चित्र भेंटकर सम्मानित किया। ओम प्रकाश आर्य प्रबंधक द्वारा घनश्याम सनातन को ओम चित्र भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में दादाजी की छड़ी, योग स्तूप, और अपना देश बनाने वाले गीत का बच्चों के द्वारा प्रदर्शन देखकर लोगों ने खूब तालियां बजाईं साथ ही संस्कार नाटक, राजस्थानी गीत, स्वच्छता गीत, बसंत और होली गीत प्रस्तुत कर बच्चों ने खूब वाहवाही लूटी। इसके अतिरिक्त अनेक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जिसका अतिथियों और दर्शकों ने खूब सराहना की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिवांगी गुप्ता ने कहा कि अपनी शिक्षा के द्वारा विद्यार्थी को यदि कंकर से शंकर की यात्रा करनी है तो शिक्षक के थपेड़े व कड़े अनुशासन से गुजरना ही पड़ेगा।

आज जो महिलायें सभी उच्च पदों को सुशोभित कर रहीं है वह वास्तव में महर्षि दयानन्द के योगदान से ही सम्भव हो सका है। प्रधानाचार्य आदित्यनारायण गिरि ने बताया कि बच्चों में अपार ऊर्जा होती है पर शिक्षक उस ऊर्जा को देश को प्रकाशित करने वाली ऊर्जा के रूप में बदल देता है। प्रबंधक ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि किसी देश का निर्माण, सुरक्षा व प्रगति एक संस्कारवान सुशिक्षित नागरिक ही करता है और शिक्षा में महर्षि दयानन्द के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता जिन्होंने जाति पाति ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर सबके लिए समान शिक्षा का मंत्र दिया। उनके बताए गए मार्ग पर चलकर पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। इस अवसर पर राजेश्वरी और जीविका को श्रेष्ठ छात्रा का पुरस्कार दिया गया। शिक्षिका अनीशा मिश्रा और नीतीश कुमार को उनकी विशेष सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया गया। अंत में प्रधानाध्यापक गरुण ध्वज पाण्डेय ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। पुरस्कार वितरण एवं सहभोज के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अरविंद श्रीवास्तव, दिनेश मौर्य, अनूप कुमार त्रिपाठी, नितीश कुमार, सुधीर कुमार, सूर्य कुमार शुक्ल, प्रमोद नेता, सुनील कुमार गुप्ता, बिन्देश यादव जिला संचालक आर्य वीर दल बस्ती, अंशिका पाण्डेय, स्वप्नल, ज्योति सोनी, पूजा साहनी, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गरुणध्वज पाण्डेय

Viyasmani Tripaathi

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