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ब्राम्हण कभी जातिवादी नहीं रहा सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना होगा
जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे वह गुरू वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा दिया होता तो महाभारत न होता गुरू वशिष्ठ, चारो भाईयों के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 20 को

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। महर्षि वशिष्ठ आश्रम बढ़नी मिश्र में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के श्री मुख से वशिष्ठ रामायण कथा के दूसरे दिन रामभद्राचार्य जी ने कहा कि वे अपने परिवार मंें 1415 वीं कथा कह रहे हैं। ‘गुरु गृह गए पढ़न रघुराई, अल्प काल विद्या सब आइ; साक्षात ईश्वर अपने चारों भाइयों के साथ गुरू वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा लेने आये। जिससे ईश्वर ज्ञान प्राप्त करे वह गुरू वशिष्ठ साधारण नहीं हो सकते। कथा के क्रम में रामभद्राचार्य ने कहा कि सरकार को यूजीसी का नया नियम वापस लेना ही होगा। समाज का विभाजन स्वीकार्य नहीं हैं।
रामभद्राचार्य ने कहा कि ब्राम्हण कभी जातिवादी नहीं रहा। दुर्भाग्य से अनेक ब्राम्हण मांस सेवन, मछली खाने के साथ ही शराब का सेवन करने लगे हैं। ऐसे में ब्राम्हणों को स्वयं जागरूक होना होगा। महात्मा जी ने कहा कि गुरू वशिष्ठ, माता अरून्धती ने विश्व कल्याण के लिये अनेक पद्धतियों को जन्म दिया। रामभद्राचार्य ने बताया कि 20 फरवरी शुक्रवार को दिन में 12 बजे से गुरू वशिष्ठ, माता अरून्धती, श्रीराम, लक्ष्मण, भरत-शत्रुघ्न और विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। रामभद्राचार्य ने कहा कि वे स्वयं जातिवादी नहीं हैं। रामभद्राचार्य जी ने कहा कि बस्ती को वशिष्ठ नगर होना ही है। बढनी मिश्र गांव की अपनी आध्यात्मिक विशेषता है। रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरू वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर दिया।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना न किया होता तो महाभारत न होता। गुरू वशिष्ठ ने राजकुमारों के साथ सभी वर्गो को शिक्षा दिया।
कथा के यजमान दिनेश मिश्रा, मीरा मिश्रा, राम चरन मिश्रा , राधे रमण मिश्रा , पावन उपाध्याय , वंदना को आचार्य रामचन्द्रदास जी महाराज ने चरण पादुका पूजन कराया। आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह और कमेटी के सदस्यों ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राना दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पूज्य गुरूदेव ने बस्ती को वशिष्ठ नगर बनाये जाने का उद्घोष कर दिया है। वे लम्बे समय से इसके लिये संघर्ष कर रहे हैं। निश्चित रूप से यह लक्ष्य गुरू कृपा से पूर्ण होगा। कथा आयोजक राना दिनेश प्रताप सिंह ने भरे मंच से बस्ती को वशिष्ठ नगर किए जाने की मांग की रामभद्राचार्य जी से की किया जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। बताया की तीसरे दिन शुक्रवार को महर्षि वशिष्ठ जी की प्राण प्रतिष्ठा एवं कथा अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला एवं पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर राय कथा में सम्मिलित होंगे।
इसी कड़ी में वशिष्ठ रामायण कथा की सांस्कृतिक संध्या में वशिष्ठ धाम से पधारे मथुरा वृंदावन से नम्रता सिंह सुर संग्राम से उर्मिला राज, अभिषेक राणा ने ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’ ‘मंगल भवन अमंगल हारी , तोहार लंका जारी हमार पूछ से , जो प्रेम गली में आया नहीं वो प्रेम क्या जाने आदि भजनों ने कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं ,को भाव विभोर कर दिया।
कथा के दूसरे दिन प्रमुख रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष नगर श्रीमती नीलम सिंह ‘राना’ , रानी आशिमा सिंह , दिल्ली हिंदू फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष डॉ. विनय प्रताप सिंह , सतीश मिश्रा, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवाकर मिश्रा , राजीव पांडेय, प्रदीप पाण्डेय , सत्य प्रकाश सिंह, संतोष मिश्रा, आलोक मिश्रा, विकास मिश्रा, संजय मिश्रा, विशाल यादव, सच्चिदानंद मिश्रा, नीतीश पाण्डेय , सोनू दुबे , सुभाष दुबे , अवधेश मिश्रा , मास्टर शिव, अश्वनी श्रीवास्तव, सतेंद्र श्रीवास्तव आरोग्य भारती के अखिल भारतीय संघटन सचिव डॉक्टर अशोक कुमार वाष्णेय , डॉक्टर संग्राम सिंह, डाक्टर दीपक सिंह, डॉक्टर वी.के. श्रीवास्तव , निरंकुश शुक्ला, डॉक्टर प्रीतम गुप्ता, पप्पू सिंह बेइली प्रधान कौशलेंद्र सिंह के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।

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