शायरी

शेर और शायरी – अंजली पाण्डेय 

 

शेर

लेखिका: अंजली पाण्डेय

भला दिल कैसे चाहे अपने हक़ में गवाही देने को,

जब इस दामन पर दाग़ अपनों को लगाते देखा।

मेरे फैसले पर मुझे बेवफ़ा कहने वाले,

तुझे कोई हक़ नहीं अपनी बेटी से इख़लास की उम्मीद करने की।

मैं चौकी नहीं देख तेरी ख़यानत को,

तेरी रुस्वाइयों ने इस कदर मुझे मज़बूत किया था।

शायरी

1:

तन्हाई की गलियों में मुझे छोड़ने वाले,

तू वफ़ा की बात न कर, ए दिल तोड़ने वाले।

नादान कलियों को आते ही पसंद अक्सर ऐसे ही माली,

जो होते हैं हुस्न की बागियों को उजाड़ने वाले।

2:

तू मत कर वफ़ा की बात, वफ़ा शर्मिंदा होगी।

जिंदगी के हर कदम पर तेरी आज़माइशें होंगी।

जब तेरी बेटी लेगी अपने महबूब के यादों की शीशियां,

तब तुझसे मेरी शीशियों की अर्ज़िश होगी।

Viyasmani Tripaathi

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