शायरी

इश्क़ और एहसास की गहराई

 

लेखिका अंजली पाण्डेय

गलती नहीं, तूने गुनाह किया है।

इस जहाँ पे जो तूने ऐतिमाद किया है।

इस वक्त तेरी हालत बिलकुल वैसे ही है,

जैसे कसाई ने किसी को जबाह किया हो।

मुझे लगता था हक़ है हर दिए को रोशनी का।

उसने जब अपना हक़ किया, तो ये दिल बे-नूर हो गया।

तेरा मुझको बेवफ़ा कहना लाज़मी है।

मैंने मुहब्बत से बढ़कर बाप के अहम को चाहा।

देखा कर मेरे इश्क़ की गहराई को।

लाज़मी है समंदर के गुरूर का चूर-चूर होना।

Viyasmani Tripaathi

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