उत्तर प्रदेशदेशधर्मबस्ती

माता-पिता का अनादर करने वाले सभी धुंधकारी -मुक्तामणि शास्त्री

9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती । जिसके चरित्र को देखने मात्र से ही घृणा हो वहीं धुंधकारी है। वह अपने कुकर्मो से प्रेत बनता है । गोकर्ण जैसा भाई और भागवत ही प्रेत योनि से मुक्ति दिला सकते हैं। जो पुत्र अपने माता पिता का अनादार कर दुराचार और पापाचार करते हुये समाज को कष्ट देते हैं वे सभी धुंधकारी हैं। धुंधकारी पांच वेश्याओं में फंस जाता है, शव्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध जीव को बांध लेते हैं। जिन हाथों से श्रीकृष्ण की सेवा न हो, जो हाथ परोपकार न करें वे हाथ शव के समान हैं। तन और मन को दण्ड दोगे तो पाप का क्षय होगा। श्रीमद्भागवत मुक्ति की कथा है। यह सद् विचार मुक्तामणि शास्त्री महाराज ने दुर्गा नगर आदर्श परिवार कटरा में आयोजित 9 दिवसीय कथा में दूसरे दिन व्यास पीठ से व्यक्त किया।

महात्मा जी ने कहा कि सत्य को समर्पित करने वाला ही सत्ता का अधिकारी है। सत्य स्वरूप परमात्मा के प्रति जब जीव का समर्पण होता है तभी कर्तव्य का ज्ञान होता है। महात्मा जी ने कलयुग के प्रवेश, धर्म के दुःखी होने, नारद के प्रयास और परमात्मा के अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुये कहा कि भागवत कथा के श्रवण से वासना की ग्रन्थियां टूटती है। वैकुण्ठ में जो आनन्द है वही भागवत कथा में मिलता है। मंगलाचरण के महत्व का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि सत्कर्मो में अनेक विघ्न आते हैं। भगवान शिव का सब कुछ अमंगल है किन्तु उनका स्मरण मंगलमय है। उन्होने काम को जलाकर राख कर दिया, मनुष्य जब तक सकाम है उसका मंगल नहीं होता। ईश्वर के अनेक स्वरूप हैं किन्तु तत्व एक है। ध्यान करने से ईश्वर और जीव का मिलन होता है। जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश भी लीला है। कृष्ण गांधारी से मिलने गये तो गांधारी ने उन्हें शाप दिया कि तुम्हारे बंश में कोई भी नहीं रहेगा। इसमें भी श्रीकृष्ण आनन्दित है।

कथा का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने आत्मदेव, गोकर्ण, धुन्धकारी और मंगलाचरण प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि मांगने से प्रेम की धारा टूट जाती है। प्रभु से कुछ मत मांगो, ईश्वर को अपना ऋणी बनाओ। ईश्वर पहले हमारा सर्वस्व ले लेते हैं और फिर अपना सर्वस्व हमें दे देते हैं। गोपियांे ने भगवान से कुछ नहीं मांगा, गोपियों का प्रेम शुद्ध है। वे जब भी भगवान का स्मरण करती हैं तो ठाकुर जी को प्रकट होना पड़ता है। गोपाल शर्मा, लक्ष्मण, आशीष ने भक्ति गीतों से वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पाण्डेय, उपाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय आदि ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन अर्चन किया। श्रोताओं में मुख्य रूप से सतीश चन्द्र मिश्र, राजेन्द्र सिंह, सुनील कुमार आर्या, राजेन्द्र पाण्डेय, रामचन्द्र वर्मा, कृष्ण कुमार तिवारी, दिनेश पाण्डेय ‘बब्लू’, सर्वेश यादव, राकेश पाण्डेय पिन्टू, उपेन्द्र पाण्डेय, जितेन्द्र पाण्डेय, अमरेन्द्र उपाध्याय, बुद्धि सागर ‘बब्लू’ के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलायें, भक्त शामिल रहे।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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