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गंगाशहर के तपस्वीजनों ने लाडनूं में आचार्य महाश्रमण जी से लिया आशीर्वाद, धार्मिक गतिविधियों की दी जानकारी

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
लाडनूं/गंगाशहर। गंगाशहर के वर्षीतप करने वाले तपस्वीजनों एवं भक्तामर मंडल के सदस्यों ने सामूहिक रूप से लाडनूं पहुंचकर आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर जतनलाल दूगड़ ने आचार्य प्रवर के समक्ष निवेदन करते हुए बताया कि गंगाशहर क्षेत्र में इस वर्ष उल्लेखनीय तपस्याएं जारी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में श्रावक-श्राविकाओं में 5 पुरुष एवं 40 महिलाएं, कुल 45 साधक वर्षीतप कर रहे हैं।
दूगड़ ने आचार्य महाश्रमण जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा एवं कृपा से पिछले वर्ष मुनिश्री कमलकुमार जी का गंगाशहर प्रवास अत्यंत सार्थक रहा। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में तप, जप एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की निरंतरता बनी हुई है।
उन्होंने आगे बताया कि गंगाशहर में तपस्याओं की अनुमोदना एवं सामाजिक मांगलिक अवसरों पर भक्तामर अनुष्ठान के आयोजन हेतु एक विशेष समूह का गठन किया गया है। इस समूह द्वारा नवम्बर माह से अब तक 40 से अधिक भक्तामर अनुष्ठान सम्पन्न किए जा चुके हैं। साथ ही नियमित रूप से सामायिक, प्रतिदिन उपवास की बारी, प्रत्येक रविवार नमस्कार महामंत्र जाप, मंगलवार को भिक्षु भजन संध्या, प्रातःकालीन उपासना एवं सायंकालीन प्रतिक्रमण जैसे धार्मिक कार्यक्रम निरंतर संचालित हो रहे हैं।
इस मौके पर आचार्य प्रवर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि तपस्या और स्वाध्याय भगवान द्वारा बताए गए मोक्ष मार्ग के महत्वपूर्ण अंग हैं। वर्षीतप जैसी दीर्घकालीन तपस्याएं विशेष महत्व रखती हैं। इसके साथ माला, जप, संयम एवं अन्य प्रत्याख्यान का पालन भी आत्मकल्याण के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान महिला साधिकाओं ने सामूहिक रूप से ओजस्वी और सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस धर्म यात्रा के दौरान तपस्वीजनों एवं श्रद्धालुओं ने मुख्यमुनि महावीर मुनि, साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी एवं साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी सहित अन्य संत-साध्वियों के दर्शन-सेवा कर आध्यात्मिक संतोष की अनुभूति की।
लाडनूं में श्रद्धालुओं के ठहरने एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान परिसर स्थित नव निर्मित बीकानेर भवन के मैत्री सदन में की गई। इस आयोजन की सफल व्यवस्थाओं में किशनलाल बैद एवं हनुमानमल सेठिया का विशेष सहयोग रहा।

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