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स्वयं को क्षमा करना ही आत्मविकास की पहली सीढ़ी: डॉ. नवीन योगी

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। प्रख्यात योग चिंतक डॉ. नवीन योगी ने कहा है कि जीवन में की गई गलतियों को लेकर स्वयं को दोषी ठहराते रहना मानसिक शांति और आत्मविश्वास दोनों को कमजोर करता है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी हम अनजाने में ऐसे शब्द कह देते हैं या ऐसे कार्य कर बैठते हैं, जिनके लिए बाद में गहरा पश्चाताप होता है—विशेषकर तब, जब किसी अपने का दिल दुखा हो। ऐसे समय में स्वयं को क्षमा करना आत्मिक शांति की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।
डॉ. योगी ने रहीम के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए कहा—
“रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय,
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।”
उन्होंने समझाया कि संबंधों की कोमलता को बनाए रखने के लिए संवेदनशीलता और विनम्रता आवश्यक है।
स्वयं को माफ करने के पाँच प्रमुख उपाय
1. दूसरों को दोष देना बंद करें
डॉ. योगी ने कहा कि सबसे पहले अपनी गलती को ईमानदारी से स्वीकार करना जरूरी है। घटना को विस्तार से लिखें और यह समझें कि उसमें आपकी भूमिका क्या थी। परिस्थितियों या अन्य व्यक्तियों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन करें। यह प्रक्रिया असहज लग सकती है, परंतु यही आत्मविकास का प्रारंभ है।
2. माफी मांगने में संकोच न करें
उन्होंने कहा कि सच्चे मन से माफी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का परिचायक है।
“कुछ इस तरह हमने अपनी जिंदगी आसान कर ली,
कुछ को माफ कर दिया और कुछ से माफी मांग ली।”
माफी मांगने से न केवल संबंध सुधरते हैं, बल्कि भविष्य में वही गलती दोहराने की संभावना भी कम हो जाती है।
3. नकारात्मक विचारों को तुरंत त्यागें
कई बार सामने वाला माफ कर देता है, लेकिन हम स्वयं को माफ नहीं कर पाते। डॉ. योगी के अनुसार स्वयं को क्षमा करना एक प्रक्रिया है, जो समय के साथ परिपक्व होती है। जब भी नकारात्मक विचार आएं, गहरी सांस लें और ध्यान को किसी सकारात्मक गतिविधि में लगाएं।
4. शर्म से छिपने के बजाय सामना करें
गलती के बाद लोगों से नजरें चुराना समस्या का समाधान नहीं है। साहस के साथ सामने आकर संवाद करना आवश्यक है। अक्सर हमारा डर वास्तविकता से अधिक बड़ा होता है। जब हम हिम्मत जुटाते हैं, तो पाते हैं कि स्थिति उतनी कठिन नहीं थी जितनी हमने कल्पना की थी।
5. अपनी गलतियों के लिए आभारी बनें
डॉ. योगी ने कहा कि हर गलती हमें कुछ सिखाती है। जिन गलतियों से हमें पीड़ा या शर्मिंदगी हुई, वही हमें अधिक मजबूत, समझदार और परिपक्व बनाती हैं। यदि हम उनका विश्लेषण करें, तो पाएंगे कि उन्हीं अनुभवों ने हमें जीवन की गहराई समझने योग्य बनाया है।
अंत में उन्होंने कहा कि स्वयं को क्षमा करना आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। जब हम अपने भीतर शांति स्थापित कर लेते हैं, तभी हम दूसरों के प्रति भी अधिक संवेदनशील और करुणामय बन पाते हैं।

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