उत्तर प्रदेशब्रेकिंग न्यूज़लखनऊशिक्षास्वास्थ्य
योग के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति संभव – प्रो. डॉ. नवीन सिंह

वेदान्त सिंह की रिपोर्ट
लखनऊ। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना के विस्तार का एक सशक्त माध्यम है। यह विचार प्रो. डॉ. नवीन सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत, ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को बाह्य संसार से आंतरिक चेतना की ओर ले जाकर वास्तविक ज्ञान से जोड़ता है।
प्रो. सिंह ने बताया कि योग का प्रमुख उद्देश्य चेतना का विस्तार करना है। जब साधक सीमित मन और बुद्धि से ऊपर उठता है, तब वह स्वयं और जगत को अधिक गहराई से समझ पाता है। योग के अभ्यास से मन की चंचलता शांत होती है और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे ज्ञान ग्रहण करने की क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि ध्यान और समाधि योग के महत्वपूर्ण अंग हैं। इन अवस्थाओं में मन पूर्ण रूप से केंद्रित होकर सूक्ष्म अनुभवों को ग्रहण करता है। यही अवस्था व्यक्ति को आत्म-विज्ञान की ओर ले जाती है, जहाँ वह अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन के उद्देश्य को समझने लगता है।
प्रो. सिंह के अनुसार, योग इन्द्रियों के संयम का भी मार्ग सिखाता है। जब व्यक्ति बाहरी विकर्षणों से मुक्त होकर भीतर की यात्रा करता है, तब उसे गहन आंतरिक ज्ञान की अनुभूति होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान भी अब चेतना और मन के प्रभाव को स्वीकार कर रहा है, जिससे योग विज्ञान और अध्यात्म के बीच एक सेतु के रूप में उभर रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है, बल्कि उसे जीवन के गूढ़ ज्ञान से भी परिचित कराता है। योग के माध्यम से प्राप्त आत्म-ज्ञान ही जीवन को सार्थक और समृद्ध बनाता है।

Subscribe to my channel


