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खेजड़ी_आंदोलन : सरकार को अंतिम अल्टीमेट चेतावनी, मांगें नहीं मानी तो मेले को बनाया जाएगा धरना स्थल

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर।
बीकानेर में चल रहे खेजड़ी संरक्षण आंदोलन ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। आंदोलन से जुड़े पर्यावरण प्रेमियों और साधु-संतों ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार और प्रशासन को अंतिम अल्टीमेट चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी हाल में एक भी खेजड़ी का पेड़ नहीं कटने दिया जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि जिला कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी गई कि आंदोलन से जुड़े लोगों को किसी भी प्रकार से परेशान या प्रताड़ित न किया जाए।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार ने पहले इस आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो अब आंदोलन से जुड़े लोगों की प्रोफाइल खंगाल कर उन्हें दबाव में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में आंदोलन से जुड़े मनोज बिश्नोई को उनके होटल संबंधी मामले में प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने का भी उल्लेख किया गया। आंदोलनकारियों ने इसे दबाव की कार्रवाई बताया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आगामी दिनों में आयोजित होने वाले मेले को खेजड़ी संरक्षण के नाम समर्पित कर दिया जाएगा और उसे धरना स्थल में बदल दिया जाएगा। आंदोलनकारियों का दावा है कि उस समय धरने में भाग लेने वालों की संख्या दस गुना तक बढ़ जाएगी।
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब आंदोलनकारी अपने बिस्तर साथ लेकर धरना स्थल पर बैठेंगे और जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि खेजड़ी का पेड़ राजस्थान की पारंपरिक और पर्यावरणीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यह आंदोलन पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास के मुद्दे पर व्यापक बहस का कारण बन सकता है।
आंदोलनकारियों ने अंत में “जय गुरु जंभेश्वर भगवान” के जयकारे के साथ सरकार से सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

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