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भस्त्रिका प्राणायाम से शरीर को मिलती है नई ऊर्जा – योगाचार्य वेदांत सिंह
श्वसन, पाचन और प्रतिरक्षा तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती (वेदांत टाइम्स)। योग विज्ञान में भस्त्रिका प्राणायाम को एक शक्तिशाली श्वसन अभ्यास माना गया है, जो नियमित अभ्यास से शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राणायाम तेज गति से श्वास-प्रश्वास के माध्यम से शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और अनेक शारीरिक समस्याओं से बचाव में सहायक सिद्ध होता है।
योगाचार्य वेदान्त सिंह ने बताया कि भस्त्रिका प्राणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। गहरी और तीव्र श्वास के कारण अधिक मात्रा में ऑक्सीजन शरीर तक पहुँचती है, जिससे श्वसन तंत्र सुदृढ़ होता है। दमा, ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में भी यह अभ्यास लाभकारी माना जाता है।
उन्होंने बताया कि नियमित रूप से भस्त्रिका प्राणायाम करने से रक्त संचार बेहतर होता है और रक्तचाप संतुलन में रहता है, जिससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
भस्त्रिका प्राणायाम का एक महत्वपूर्ण लाभ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना भी है। यह अभ्यास शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। मानसिक स्तर पर यह तनाव, चिंता और थकान को कम कर मन को शांति प्रदान करता है।
योगाचार्य वेदान्त सिंह ने यह भी कहा कि भस्त्रिका प्राणायाम एक उग्र प्राणायाम है, इसलिए इसका अभ्यास अनुभवी योग गुरु के निर्देशन में ही करना चाहिए, विशेषकर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
— योगाचार्य वेदान्त सिंह
संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती

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