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पीपाड़ में मायरा बना सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
हिंदू–मुस्लिम भाईचारे का भावुक उदाहरण देखने को मिला

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
पीपाड़ शहर में रविवार को मायरा परंपरा के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। मायरा केवल एक पारिवारिक परंपरा नहीं, बल्कि भाई–बहन के प्रेम, मोहब्बत और सामाजिक एकता का प्रतीक है—और यही भाव इस आयोजन में पूरी तरह झलका।
रविवार 01 फरवरी 2026 को जैना बाई, बिटिया अलदीन खानजी मुम्बजा (खारिया) का ₹4 लाख 51 हजार का मायरा पीपाड़ शहर के रेखा मैरिज गार्डन परिसर में भरा गया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू समाज के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और हिंदू–मुस्लिम एकता व भाईचारे की सशक्त मिसाल पेश की।
कार्यक्रम में पूर्व सरपंच श्री रामसिंह जी चौहान, श्री तेजाराम जी सेंगवा, श्री बद्रीराम जी (गारू ढाणी), श्री बुद्धाराम जी सुथार, श्री हनुमनाराम जी सेंगवा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों के आगमन पर उनका साफा पहनाकर एवं आत्मीय स्वागत किया गया।
इस अवसर पर गिनायत जनाब हाजीखान/हकीमखान जी जडेजा, बहनोई जनाब अलदीन खान जी जडेजा (पीपाड़), जैना बिटिया के नानोसा जनाब गनिखान जी डेराणी (80), सिंधी नगर, तथा खारिया मस्जिद के पेश इमाम मौलाना सलीमखान साहब का भी सम्मानपूर्वक साफा पहनाकर इस्तकबाल किया गया।
समारोह में अणुव्रत मंत्री सफरूखान ने नैतिकता, सद्भावना एवं नशा मुक्ति का संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई बीड़ी, सिगरेट या गुटखे की पेशकश करे तो “ना सा ना” कहें, और बार-बार चाय, कॉफी या ठंडे की मनुहार पर “बस सा बस” कहना सीखें, क्योंकि नशा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक सामाजिक समारोह में स्वागत बैनर अवश्य लगाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में जनाब दाऊद खान जी मुम्बजा, गफूर खान जी, रेहमत खान जी, धने खान जी, अलाबक्स खान जी, अलदीन खान जी, रतन खान जी, कालूखान जी, हाजी हासम खान जी (मेरानी, सिंधी नगर), रजाक खान जी, डॉ. रमजान खान जी, हाजी गिसे खान जी, मुराद खान जी जियानी, उसब खान जी जडेजा, रेहमू खान जी भागानी, काबूल खान जी, मुफ़्ती नेकू खान जी, साबिर खान जी सहित समस्त मुम्बजा खानदान ने पधारे सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह आयोजन न केवल सामाजिक परंपराओं को सहेजने का उदाहरण बना, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव, आपसी प्रेम और भाईचारे का सशक्त संदेश भी समाज को देकर गया।

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