उत्तर प्रदेशदेशधर्मबस्ती

जिसके जीवन में श्रीमद्भागवत की बूंद पड़ी, उसके हृदय में आनंद ही आनंद-मुक्तामणि शास्त्री

9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती । जिसके जीवन में श्रीमद्भागवत की बूंद पड़ी, उसके हृदय में आनंद ही आनंद होता है। भागवत को आत्मसात करने से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा हो सकती है। भगवान को कहीं खोजने की जरूरत नहीं, वह हम सबके हृदय में मौजूद हैं। यह सद् विचार मुक्तामणि शास्त्री महाराज ने दुर्गा नगर आदर्श परिवार कटरा में पांचवे दिन व्यास पीठ से व्यक्त किया।

प्रहलाद चरित की कथा सुनाते हुये महात्मा जी ने कहा कि यदि भक्त सच्चा हो तो विपरीत परिस्थितियां भी उसे भगवान की भक्ति से विमुख नहीं कर सकती। भयानक राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्यकश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रह्लाद ने अपनी ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी और सच्चे अर्थों में कहा जाए तो प्रह्लाद द्वारा अपने पुत्र होने का दायित्व भी निभाया गया। पुत्र का यह सर्वोपरि दायित्व है कि यदि उसका पिता कुमार्गगामी और दुष्ट प्रवृत्ति का हो तो उसे भी सुमार्ग पर लाने के लिए सदैव प्रयास करने चाहिए। प्रह्लाद ने बिना भय के हिरण्यकश्यप के यहां रहते हुए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया और पिता को भी उसकी ओर आने के लिए प्रेरित किया। लेकिन राक्षस प्रवृत्ति के होने के चलते हिरण्यकश्यप प्रहलाद की बात को नहीं मानता। ऐसे में भगवान नरसिंह द्वारा उसका संहार हुआ उसके बाद भी प्रह्लाद ने अपने पुत्र धर्म का निर्वहन किया और अपने पिता की सद्गति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

महात्मा जी ने कहा कि गोविंद नाम बोलने से अजामिल का उद्धार हुआ। जबकि वह बड़ा पापी था। उसने ऋषियों की सलाह पर अपने बेटे का नाम गोविंद रखा था और अंत समय में जब उसके अपने बुरे कर्मों की वजह से साक्षात यमदूत दिखने लगे तो उसने खुद को बचाने के लिए अपने बेटे को पुकारा। और ऐसे में भगवान का नाम सुनकर यमदूत लौट गए। जब भगवान का नाम सुनकर यमदूत अजामिल जैसे पापी को छोड़ सकते हैं तो दूसरों का उद्धार क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने कहा बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रखें और मन को साफ रखें। यही भगवान को पाने का रास्ता है।

महात्मा जी ने कहा कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करों। उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। ईषालु व्यक्ति अपने जीवन में कभी प्रगति नहीं कर सकता। ऐसे व्यक्तियों को भगवान सूर्य, वायु, नदियों, बादलों व वृक्षों इत्यादि से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के सृष्टि के सभी प्राणियों को अपना प्रकाश देते हैं। वायु सभी जीवों में प्राणों का संचार करती है। बादल परोपकार के लिए गरजते हुए वर्षा करते है, नदियां किसी से नहीं पूछती कि तुम मेरा जल क्यों पीते हो और वृक्ष भी किसी व्यक्ति से यह नहीं पूछते कि तुम मेरे फल क्यों तोड़ते हो, लेकिन स्वार्थी मानव इर्ष्यालु होता जा रहा है। यदि अपना उद्धार करना चाहते हो तो परोपकार में अपना जीवन लगाओ, जिससे तुम्हारा कल्याण होगा।

श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पाण्डेय, उपाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय आदि ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन अर्चन किया। श्रोताओं में मुख्य रूप से भगवान प्रसाद तिवारी, , रामचंद्र वर्मा, फूल चंद्र पांडेय, सर्वेश यादव, करीम खान कृष्ण मणि ओझा, जितेन्द्र पाडेय, विशाल ओझा, विवेक, बबलू यादव, यश पाण्डेय, सतीश चन्द्र मिश्र, राजेन्द्र सिंह, सुनील कुमार आर्या, राजेन्द्र पाण्डेय, रामचन्द्र वर्मा, कृष्ण कुमार तिवारी, दिनेश पाण्डेय ‘बब्लू’, सर्वेश यादव, राकेश पाण्डेय पिन्टू, उपेन्द्र पाण्डेय, जितेन्द्र पाण्डेय, अमरेन्द्र उपाध्याय, बुद्धि सागर ‘बब्लू’ के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलायें, भक्त शामिल रहे।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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