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बाल्मिकी रामायण समरसता का पवित्र ग्रंथ

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

*बाल्मिकी रामायण समरसता का पवित्र ग्रंथ*

          अखिल भारतीय साहित्य परिषद नोखा इकाई ने बाल्मीकि जयन्ती व काव्यगोष्ठी का आयोजन जयकिशन महाराज, रोड़ा के सानिध्य में किया । कवयित्री व गीतकार उर्मिला तापड़िया ने महर्षि बाल्मीकि रामायण को समरसता का सर्वोच्च ग्रंथ बताया।

        इस अवसर पर नोखा इकाई के‌ अध्यक्ष व प्राचार्य जयदेव सिंह बीठू ने प्राचीन ग्रंथ रामायण को अनुपम साहित्य बताते हुए वर्तमान युग में उनके आदर्शों व मर्यादाओं की महत्वपूर्ण प्रासंगिकता बताई ।

            राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने अपने उदबोधन में सभी महापुरुषों को‌‌ हम सबके महापुरुष बताया ।

              शिक्षक संघ राष्ट्रीय, प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश बिश्नोई ने इस प्रकार के आयोजन समय समय पर करते रहने का आह्वान किया।

          विजय कुमार तिवाड़ी ‘विशू’ ने अपनी ओजस्वी वाणी में काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

            महावीर शर्मा ने बाल्मीकि रामायण के विभिन्न श्लोकों की सुक्षम विवेचना कर काव्यपाठ किया । शिव‌ गहलोत ने अपनी मार्मिक कविता महर्षि बाल्मीकि को समर्पित की । प्राचार्य विवेक कुमार सीलवा, मिट्ठू सिंह, दीपक कुमार ‘गंगानगरी’ , सतवीर सिंह, व्याख्याता दिनेश कुमार आदि विद्वान उपस्थित रहे।

       साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष नेमीचन्द गहलोत ने भारतीय ज्ञान परम्परा को वाक् केन्द्रित बताते हुए महर्षि बाल्मीकि को संस्कृत में रामायण कंठस्थ होना दिव्य ज्ञान का प्रमाण बताया । उन्होंने कहा सबरी के बेर और केवट प्रसंग से बढ़कर समरसता का विश्व में कोई दूसरा उदाहरण नहीं है।

          अखिल भारतीय साहित्य परिषद नोखा इकाई के उपाध्यक्ष ने इस सफल आयोजन के लिए सभी विद्वान कवियों का आभार व्यक्त किया ।

             मंच संचालन जयकरण दान चारण ने किया ।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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