धर्मबालोतराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
पर्वाधिराज पर्युषण पर्व भगवंती संवत्सरी आराधना-साधना व तप-तपस्या के साथ उत्साह से मनायाः
प्रतिक्रमण के बाद खमत खामणा-मिच्छामि दुक्कड़म् से किया एक-दूसरे का अभिवादन -जैन धर्मावलांबियों ने शहर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में मुनि-साध्वीवृंद के प्रवचन सुन आध्यात्मिक लाभ लिया।

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा। जिला मुख्यालय बालोतरा समेत समूचे जिले में जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख महापर्व पर्वाधिराज पर्युषण के अंतर्गत भगवती संवत्सरी पर्व बुधवार को उपासना-आराधना के बीच उत्साह-उमंग, हर्षोल्लास तथा साधकों और उपासकों की कठोर तपस्या के साथ धूमधाम से मनाया गया। पर्वाधिराज पर्युषण के तहत भगवती संवत्सरी पर्व के उपलक्ष में बुधवार को शहर के विभिन्न ओपासरों, भवनों में विराजित मुनि-साध्वीवृंद के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
एक पखवाडे़ तक चले पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दौरान जगह-जगह आयोजित हुए धार्मिक कार्यक्रमों में जैन धर्मावलंबियों ने उत्साह व उमंग के साथ शिरकत कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। वहीं बुधवार को शाम प्रतिक्रमण के बाद सभी ने खमत-खामणा व मिच्छामि-दुक्कड़म् के उद्बोधन से एक-दूसरे का अभिवादन किया।
पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के दौरान जैन धर्म व अन्य वर्गों के लोगों ने काया कल्याण के लिए कठोर साधना व उपासना की।
जिला मुख्यालय बालोतरा शहर के जूनाकोट (महावीर चौक), गौर का चौक पीएनबी बैंक, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ नया सभा भवन, स्थानकवासी भवन सहित अनेक निर्धारित ओपासरों, भवनों आदि में विराजित मुनि-साध्वीवृंद की निश्रा में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
इस दौरान पर्युषण पर्व को लेकर जैन धर्मावलंबी एकासना, उपवास, बेला, तेला व अठ्म तप के साथ ही एक माह तक निराहार रह कर मास खमण की सघन साधना करने वाले साधक अपने जीवन के कल्याणार्थ धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साह के साथ भाग लेकर अपने आपको धन्य किया। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन बुधवार को दिनभर विभिन्न स्थानों पर धर्म-ध्यान के कार्यक्रम संपन्न हुए। वही शाम को जैन समाज की ओर से निर्धारित स्थानों पर आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रमों में जैन समाज के अनुयायियों ने मुनि-साध्वीवृंद के मुखारबिंद से धार्मिक प्रवचन श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
खमत खामणा-मिच्छामि दुक्कड़म् उद्धबोदन से किया एक-दूसरे का अभिवादनः
बुधवार को दिनभर जैन समाज के ओपासरों, भवनों आदि में विराजित मुनि-साध्वीवृंद ने जैन धर्म के अलावा विभिन्न धर्मों के महात्म्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए तप-तपस्या, साधना-आराधना करने से आमजन को मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ, सुख-समृद्धि आदि के बारे में आवश्यक जानकारी दी।
इसी दिन शाम को जैन समाज की ओर से निर्धारित अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। अंत में प्रतिक्रमण के बाद उपस्थित सैकडो़ं जैन धर्मानुयायियों ने खमण खामणा-मिच्छामि दुक्कड़म् के उद्धबोदन से एक-दूसरे का अभिवादन कर वर्ष भर में मन, कर्म और वचन से अगर कोई गलती हुई हो या फिर गलत बात आदि से आपको दिल को ठेस पहुंची हो तो अंतर्मन से क्षमायाचना करते हैं।

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