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नवरात्रि में क्यों मनाई जाती है सात कन्याओं की भोज की परंपरा

डॉक्टर संजय कुमार पांडेय स्टेट हेड बस्ती टाइम्स 24 न्यूज़ चैनल जनता की आवाज से मोबाइल नंबर 7376 3261 75
महाभारत की सटीक सही जानकारी हेतु पढ़े पूरी खबर उत्तर प्रदेश का जिला लखीमपुर खीरी भारत के नेपाल सीमा पर बसा है देशवासियों एवं प्रदेशवासियों को अवगत कराते हुए बड़ी प्रसन्नता एवं खेद का अनुभव कर रहा हूं सात प्रमुख देवियों की जन्म स्थली जिला लखीमपुर खीरी के ब्लॉक बिजुआ के पश्चिम भानपुर के पास लखीमपुर भीरा हाईवे मार्ग के दक्षिण दिशा में ग्राम पंचायत शाहपुर नजदीक ग्राम ढकिया के समीप है इन्हीं प्रमुख सात देवियों के नाम पर सात कन्याओं का भोज कराने की परंपरा प्रचलित है इनके जनक रजाबेन के अस्तित्व के अवशेष आज तक मौजूद हैं उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र शिव और शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है ग्राम पंचायत शाहपुर ढकिया के बीचो-बीच महाभारत कालीन राजा बेन का विशाल किला/ महल हुआ करता था राजा बेन ने अपने महल किले के पास ही सुंदर एवं विशाल सरोवर बनवाया था सरोवर के बीचो-बीच मुख्य मंदिर था जो खत्म हो चुका है शेष कुछ अवशेष इधर-उधर पड़े हुए हैं मान्यता है कि रजा बेन ने अपनी पुत्रीयो हेतु स्नान एवं पूजा हेतु यह विशाल तालाब एवं मंदिर बनवाया था जिस सरोवर में कभी अनगिनत कमल के पुष्प खिला करते थे आज जलकुंभी देखने को मिलेगी इस सरोवर पर अवैध कब्जे बड़े पैमाने पर हो चुके हैं तालाब के किनारे से एक छोटा सा देवी मंदिर है बताया जाता है कि कभी यहां पर बहुत बड़ा भव्य विशाल मंदिर हुआ करता था यहां के स्थानीय लोगों ने वहीं पर एक छोटा सा मंदिर का निर्माण करवा दिया सरोवर के पूर्व में एक ऊंचा टीला है जो गदाई नाथ मंदिर एवं सरोवर के बीच में पड़ता है बताया जाता है इसी खंडहर के नीचे राजा बेन के महल के अवशेष अभी भी दबे पड़े हुए हैं सरोवर के पूर्व दो पुराने मठ एवं चबूतरे बने हुए हैं जिन्हें रजाबेन एवं उनकी रानी की समाधिया कहा जाता है बताया जाता है सन 1998 में तालाब तक जाने के लिए बाबा भिखारी लाल राणा ने पुल का निर्माण करवाया था सूत्रों के मुताबिक तालाब में एक कुआं भी है जो जलकुंभी होने की वजह से अब दिखाई नहीं देता टीले का रूप ले चुके राजा बेनी का महल एवं खंडहर शारदा नदी से लगभग 1 1/2 किलोमीटर की दूरी पर है है यदि शासन एवं प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देता है तो किसी दिन शारदा नदी में यह महाभारत कालीन दृश्य समा जाएगा बताया जाता है महारानी मां आदि शक्ति भवानी की परम भक्त थी उनकी शक्ति एवं उपासना से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां सात कन्याओं का जन्म लेने का वरदान दिया था कालांतर में रानी के गर्भ से साथ कन्याओं का जन्म हुआ यह कन्याएं देवी रूप में तराई क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थापित होकर देवी के रूप में पूजित हैं लखीमपुर में संकटा देवी शीतला देवी बनकटा देवी नैमीशराण की ललिता देवी गोला गोकरण नाथ की मंगला देवी उत्तराखंड की मां मनसा देवी एवं उत्तराखंड की पूर्णागिरी देवी भी राजा बेन की ही देवी स्वरूपा कन्याएं मानी जाती हैं और इन्हीं के नाम से साथ कन्याओं को भोजन करने की परंपरा प्रचलित है महाभारत कालीन रजाबेन का साम्राज्य नेपाल से लेकर पीलीभीत जिले के देव नदी के बाएं किनारे से गोमती नदी के बाएं किनारे से समस्त भूभाग और सीतापुर जिले के हर गांव तक फैला था खीरी जिले के डिस्ट्रिक्ट गजेटियर मे भी इस बात की पुष्टि करता है राजा बेन के सात बेटियां एवं पुत्र विराट हुए पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद एक वर्ष अज्ञातवास राजा विराट के साम्राज्य मे ही बिताया था इसके प्रमाण मोहम्मदी तहसील के बलमिया वरखर में मिलते हैं वहां महाभारत कालीन टीले सरोवर और मंदिर पांडव के अज्ञातवास के साक्षी हैं देश प्रदेश की सरकार से निवेदन है कि पुनरातत्व की सभी चीजो को सहज कर रखनी चाहिए इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है यही हमारा सनातन हिंदू धर्म है
सात प्रमुख देवियों की जन्मस्थली राजा बेन ताल के नाम से प्रसिद्ध है जोकि देश एवं विदेश के प्रमुख प्रदेशों में नवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है वर्तमान प्रधान शाहपुर के द्वारा सचिवालय एवं जल जीवन मिशन की टंकी का निर्माण करवाया गया है इस पौराणिक पुरातत्व के बारे में शासन एवं प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता अति आवश्यक है

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