
ब्यूरो चीफ संतोष कुमार गर्ग बालोतरा राजस्थान
आचार्य चंद्राननसागरसूरीश्वरजी ने कहा की मनुष्य जीवन, धर्म-श्रवण, सुने हुए तत्व पर श्रद्धा और श्रद्धा के अनुसार संयम में पराक्रम, यह चार धर्मांग संसार में दुर्लभ है। आगामी चातुर्मास श्री नाकोड़ा तीर्थ पर है और 19 जुलाई को आराधकों के साथ भव्य प्रवेश होगा।
आचार्य चंद्रानंनसागरजी गुरुवार को लुनिया परिवार द्वारा निर्मित श्री जिनकुशल सूरी आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वह समय धन्य था, जिस समय परमात्मा महावीर ने भव्य जीवों के कल्याण के लिए सोलह पहर की अखंड अंतिम देशना दी थी। वे लोग भी धन्य थे जिन्होंने परमात्मा की अंतिम देशना को श्रद्धा के साथ श्रवण किया था। परमात्मा महावीर के अनमोल वचन जो अंतिम समय में फूल बनकर धरा पर बिखरे और आज तक उन फूलों की सुवास से पूरा नभ- मंडल सुवासित हो रहा है, उनका संकलन उत्तराध्ययन सूत्र में किया गया है। यह एक ऐसा सूत्र है जिसमें समस्त विषयों का समावेश हुआ है निश्चित ही परमात्मा महावीर की करुणा आदित्य थी तभी तो वे निर्वाण से पूर्व अवढरदानी बनकर अंतिम सांस तक बरसते रहे। भगवान ने साढ़े बारह वर्ष में जो अपार जीवन वैभव दिया था जैसा उनका निचोड़ उसमें प्रस्तुत हुआ भूगोल हो या खगोल, ज्ञान हो या विज्ञान, धर्म हो या कर्म, हर तथ्य पर प्रभु वीर ने अंतिम देशना का सुंदर उपहार प्रदान किया।
आचार्य ने जोर देकर कहा कि छत्तीस अध्ययनों में विभक्त यह उत्तम उत्तराध्ययन सूत्र जैसे आज तत्व जिज्ञासुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ
है। हाथ में हीरा होने पर भी यदि कोई व्यक्ति उसका मूल्य न परखे तो उसका उपयोग कैसे कर पाएगा? हीरे की मूल्यवत्ता की अज्ञानता के कारण वह जीवन भर निर्धनता और भाग्यहीनता का सामना करता है पर मूल्य को समझने वाला निर्धनता के शाप से मुक्त होकर समृद्धि के सोपान को प्राप्त करता है। मनुष्य जन्म को प्राप्त करने के बाद जिनवाणी को सुनना दुर्लभ है फिर भी जिनवाणी सुनने का अवसर मिल जाए तो उसे पर श्रद्धा करना परम दुर्लभ है क्योंकि बहुत सारे लोग शुद्ध धर्म को सुनकर भी सन्मार्ग से भ्रष्ट हो जाते हैं। श्रद्धा हो जाने के बाद भी उसको आचरण में लाना सर्वाधिक दुर्लभ है। आचार्य ने कहा कि प्रभु का शासन एवं गुरु का अनुशासन मिलने के बाद भी यदि मैं राग – द्वेष का जीवन जीता रहा तो इस मूल्यवान मनुष्य भव का भी कोई सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं होगा। इस अवसर पर संगीत सम्राट अनिल सालेचा ने गीतों की प्रस्तुति देकर सबको भाव विभोर कर दिया। शुक्रवार को सुबह गुरुदेव श्री का रामसिन मुंगड़ा की ओर प्रस्थान होगा। आगे आप जोधपुर में 7 जुलाई को महामंगलिक प्रदान करेंगे। इस अवसर पर बाबूलाल धनराज कमलेश कुमार राजू सर्राफ परिवार द्वारा मेहमानों का आभार ज्ञापित किया गया। प्रवचन में श्री जिन कुशल सूरी दादाबाड़ी ट्रस्ट बाड़मेर के अध्यक्ष गौतमचंद बोथरा, श्री जैन श्वेतांबर तपागच्छ संघ के अध्यक्ष गणपतचंद पटवारी, श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष अमृतलाल सिंघवी, सूरत से पधारे हुए गौतम चंद माडेला, शांतिलाल माडेला के साथ भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित है।

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