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भारत भूटान सीमाक्षेत्र से श्री इन्द्रचंद सोनी ( माहेश्वरी ) एक पारिजात का पौधा लेकर श्रीडूंगरगढ़ लाये

जिसे एक समारोह में श्री तोलाराम मारू को ससम्मान भेंंट किया

ब्यूरो चीफ डॉ. राम दयाल भाटी बीकानेर 

 

 श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर। तोलाराम मारू
जीव दया गौशाला में एक विशेष समारोह रखा गया जिसकी अध्यक्षता श्री डूंगरगढ़ के विभिन्न संस्थान में सक्रिय रहने वाले उत्साही मधुर भाषी सत्यनारायण मूंधड़ा द्वारा की गई तोलाराम मारु ने कहा कि श्री डूंगरगढ शहर में सत्यनारायण चांडक सत्यनारायण मूंधड़ा ,के संरक्षण में हजारों वृक्ष सार्वजनिक स्थलो पर हमारे द्वारा लगाए गए ।जो आज बहुत बड़े वृक्ष हो गए हैं 250 खजूर के वृक्ष भी तोलाराम मारू स्वयं बीकानेर से लेकर आए ।जिसका नाम खजूर अनुसंधान केंद्र रखा गया । जिसका लोकार्पण राजस्थान सरकार के मंत्री श्रीडूंगरगढ़ के तत्कालीन विधायक किशनाराम नाई द्वारा किया गया।श्री गोपाल गोशाला नगर कल्याण समिति में पदाधिकारी रहे।एवं अन्य संगठनों में भी पदाधिकारी रहें।भेरु धोरा शिव धोरा श्याम धोरा मे नगर कल्याण समिति मे सत्यनारायण चांडक के साथ वृक्ष लगाएं गए ।
महेश्वरी युवा संगठन जयगांव भूटान से सम्मान पत्र को साथ में लेकर श्री इन्द्र चंद सोनी आए । इसके लिए महेश्वरी युवा संगठन का यह सम्मान देने पर आभार प्रकट किया। इस समारोह में यह सम्मान तोलाराम मारु एवं इनकी धर्म परायण पत्नी गीता देवी मारु को भेट किया तथा मोतियों की माला पहनाई। सम्मान पत्र जिसमें उल्लेख किया सच्चे कर्मयोगी राष्ट्रहित में जनकल्याण कार्य करने और गो सेवा में तत्पर रहने वाले तोलाराम मारु निवासी श्री डूंगरगढ बीकानेर आपको पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर मंगल कामना के साथ समुंद्र मंथन से उत्पन्न एक पारिजात का पौधा देकर सम्मानित किया जाता है ।इस अवसर पर इंद्र चंद सोनी ने बताया कि पारिजात वृक्ष के बारे में कहा जाता है कि इस की उत्पत्ति समुंद्र मंथन से हुई समुंद्र मंथन से जो चौदह रत्न निकले थे उनके साथ पारिजात वृक्ष भी निकला था। जिसको देवराज इंद्र साथ ले गए। एक बार सत्यभामा ने भगवान श्री कृष्ण से कहा महाराज पारिजात वृक्ष महल मे लगाइए । जिससे वातावरण महक उठेगा। तब भगवान श्रीकृष्ण इन्द्र के पास गए। और पारिजात वृक्ष को इस धरा पर लाए ।इसके फूल सूर्योदय पर अपने आप झड़ जाते हैं भगवान श्री कृष्ण ने इस वृक्ष को वनस्पति जगत में सर्वश्रेष्ठ वृक्ष बताया। चौदह रत्नों के साथ उत्पन्न होने के कारण से इसको भी पारिजात रत्न कहा जाता है । तोलाराम मारू ने कहा कि इन्द्र चंद सोनी यह वृक्ष मेरे निवास मारु कुंज मे भेंट करना चाहते थे ।हमारे द्वारा इस दर्शनीय वृक्ष को घर पर लगाना उचित नहीं समझा और किसी सार्वजनिक स्थान पर लगाने का मन किया ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सके। घर पर कम श्रद्धालू आ पाते। इसके लिए गौशाला के प्रमुख ओमप्रकाश राठी से स्वीकृति लेनी चाही राठी जी ने तत्काल स्वीकृति दी तथा भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के समीप लगाने को कहा। जिसके लिए आभार व्यक्त किया गया। हमारे परिवार द्वारा एक पिकअप गाड़ी से सत्तासर से वृक्ष लाकर वृक्षारोपण जीवदया गोशाला में किया गया। प्रियंका स्नेहा मारू ने वृक्षारोपण में सहयोगी रहे।
समारोह अध्यक्ष सत्यनारायण मूंधड़ा ने कहा कि तोलाराम मारू का संपूर्ण जीवन जीव मात्र की सेवा के लिए है चाहे वृक्षारोपण हो चाहे गौ सेवा । तोला राम मारू के विशेष प्रयास से श्री डूंगरगढ़ में बिना जंक्शन दुरंतो रेलगाड़ी रुकनी शुरू हुई। श्री डूंगरगढ़ का नाम श्री डूंगरगढ अनेक जगहों पर कराया। नगर कल्याण समिति में सांसद कोटे से तीन लाख रुपए कीस्वीकृति सादुलपुर जाकर करवाई। जिससे चारदीवारी सात लाख रुपए में होने के बराबर कराईं। भामाशाह सत्यनारायण बिहानी इन्दौर से मिली स्वीकृति से एक बड़ा ओपन बेल खुद वहां खड़े रहकर बनवाया।
गीता देवी मारु ने कहा कि पारिजात का उल्लेख भागवत कथा ने भी आता है ।जीव दया गौशाला के मंत्री रामावतार मूंधड़ा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्री डूंगरगढ़ के प्रमुख जन रामवतार मूंधड़ा मंत्री नथमल सोनी कोषाध्यक्ष मालचंद बजाज विनोद कुमार राठी संतोष सोनी ओमप्रकाश सोनी शिव भगवान मालपानी अशोक कुमार सोनी रणजीत नाई ओमप्रकाश छंगाणी बाबूलाल उड़िया जमना प्रसाद आदि उपस्थित रहे।गो माता की जय-गो माता जय के जयकारे लगाए । पारिजात वृक्ष को सावन माह के अधिमास पर लगाने से पूर्व पूजा की गई तथा तिलक मोली आदि गीता देवी मारू द्वारा लगाया गया। वृक्ष लगाते समय तत्काल वृक्ष को घेरे में लेकर पिंजरा लगाया गया।

Viyasmani Tripaathi

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