
ब्यूरो चीफ सतीश कुमार की रिपोर्ट
*नारनौल न्यूज़*
श्री गौ गोपाल प्रचार एवं असहाय सेवा संस्थान (रजि.) के तत्वावधान में मौहल्ला खड़खड़ी स्थित श्री कल्लू मल धर्मार्थ बगीची में रविवार से शुरू श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को सर्वप्रथम आचार्य मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान महेश भालोठिया व रमेश शर्मा व संस्थान के सदस्यों को भागवत की आरती व विधान से व्यास पूजन करवाया। इसके बाद व्यासगद्दी से भगवताचार्य पं. बजरंग शास्त्री महाराज ने कथा में श्रोताओं को भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि भागवत एक अमर कथा है। भागवत कोई ग्रन्थ नही है बल्कि साक्षात नारायण का स्वरूप है।
*उन्होंने कहा कि इस कथा में कलियुग के सभी पापों को नष्ट करने की शक्ति है। भागवत कथा से ज्ञान-वैराग्य युवा होते हैं और अहंकार का नाश होता है तथा कृष्ण भक्ति की प्राप्ती होती है। आज के प्रसंग में शास्त्री जी ने महर्षि व्यासजी की पत्नी वीटिका के गर्भ से शुकदेव जी का जन्म, पांडव वंश के महाराज परीक्षित का उत्तरा के गर्भ से जन्म लेना, कलियुग का प्रादुर्भाव व उनके द्वारा संत का अपमान करना तथा श्रृंगी ऋषि द्वारा तक्षक सांप के काटने से सात दिन बाद मृत्यु होने का मार्मिक वर्णन किया। आचार्य जी ने बताया की घर परिवार का पालन पोषण करना हमारा धर्म है , लेकिन हमारी हर एक श्वास में प्रभु का नाम स्मरण होता रहे यही मानव जीवन का परम धर्म है। हम सभी को विश्वास के साथ निस्वार्थ भक्ति ही करनी चाहिये क्योंकि यही मानव जीवन का परम धर्म है।*
आचार्य जी ने बताया कि भागवत में मुख्य रूप से भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया गया है। आचार्य ने कथा में आगे बताया की भगवान नारायण की आज्ञा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि वर्णन किया। उसके उपरांत ब्रह्मा जी ने अपने शरीर से सृष्टि के पहले पुरुष मनु और स्त्री शतरूपा को महारानी को प्रकट किया और बजरंग शास्त्री ने कथा मे कहा की मनुष्य को अपने घर और समाज के कार्य करते हुए प्रभु का नाम स्मरण एवम पुण्य के कार्य भी अवश्य करते रहने चाहिये।
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*आचार्य ने कहा कि जब व्यक्ति दुनिया से विदा होकर जाता है तब सब यही छोड़कर चला जाता है। केवल उसके पुण्य कर्म एवम भजन स्मरण और उसकी अछाई बुराई ही उसके साथ जाती है।*
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