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शालीभद्र मुनि का संलेखना-संथारा सहित समाधि मरण पर महाप्रयाण सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने दी अंतिम विदाई

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

बाड़मेर/बालोतरा, 21 नवंबर —

जैन स्थानकवासी संप्रदाय के तपस्वी पूज्य श्री शालीभद्र मुनि महाराज के संलेखना-संथारा सहित समाधि मरण पर आयोजित महा प्रयाण यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण सहभागिता की। आध्यात्मिक भावनाओं और जैन शौर्य परंपरा के बीच सम्पन्न इस यात्रा में श्रद्धा, संयम और विराग की अद्भुत झलक देखने को मिली।

श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान के मंत्री ओमप्रकाश बांठिया ने बताया कि जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी प्रकाशचंद संचेती ने 47 वर्ष की आयु में धर्म सहायिका श्रीमती शशिकला जी के साथ 8 सितंबर 1994 को पूज्य तपस्वी राज श्री चंपालाल जी महाराज साहब एवं श्रूतधर श्री प्रकाशचंद्र जी महाराज साहब के सानिध्य में सादगीपूर्ण जैन दीक्षा अंगीकार की थी। करोड़ों की संपत्ति त्यागकर दीक्षा लेने वाले प्रकाशचंद संचेती का नामकरण बाद में श्री शालीभद्र मुनि के रूप में किया गया।

दीक्षा उपरांत 32 वर्षों तक कठोर तप, गहन संयम, ज्ञान-दर्शन और मौन साधना में लीन रहते हुए उन्होंने जिन शासन की महान प्रभावना की। गत कुछ वर्षों से वे बालोतरा में विराजमान थे। 16 दिन पूर्व उन्होंने चौविहार तपस्या प्रारंभ की और आंखों पर पट्टी बांधकर साधना में प्रविष्ट हुए। तत्पश्चात पूज्य श्रूतधर श्री प्रकाशचंद्र जी महाराज साहब के मंगल संकल्प से उन्होंने संलेखना-संथारा आरंभ किया।

11 दिन तक संथारा व 16 दिन के कठोर तप के दौरान वे पूर्ण समभाव, आत्म साधना और मौन में स्थित रहे।

उनकी तपस्या के समाचारों के साथ प्रतिदिन देशभर से सैकड़ों लोग दर्शन हेतु बालोतरा पहुंचते रहे। मनिंदर जीत सिंह बिट्टा, पुलिस अधिकारी दीपा जैन, पूर्व मंत्री अमरा राम चौधरी, विधायक अरुण चौधरी, मदन प्रजापत सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी दर्शन लाभ लिया।

20 नवंबर की रात 10 बजे संथारा पूर्ण होने पर उनका शांतिपूर्ण देवलोक गमन हुआ।

महाप्रयाण यात्रा में उमड़ा विशाल जनसागर

21 नवंबर की सुबह 10 बजे स्थानक भवन से महाप्रयाण यात्रा प्रारंभ हुई जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए ओसवाल मुक्तिधाम पहुंची। यात्रा में लगभग 4000 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

शालीभद्र मुनि के संसारिक परिवार की ओर से बहनें —

श्रीमती कंचनलता धारीवाल

श्रीमती तरूणा जैन

श्रीमती अनिला कोठारी

तथा अमेरिका निवासी मामा पुत्र हेमचंद बरडिया सहित परिजन एवं रिश्तेदार उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त अनेक प्रमुख सामाजिक-धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें —

सुधर्म संघ के राष्ट्रीय महामंत्री प्रकाश छाजेड़, स्थानकवासी संघ अध्यक्ष मोतीलाल हुंडिया, ओसवाल समाज अध्यक्ष शांतिलाल डागा, तेरापंथ सभा अध्यक्ष महेंद्र वैद, तपागच्छ मूर्ति पूजक संघ अध्यक्ष महेंद्र चोपड़ा, खरंतर गच्छ संघ अध्यक्ष अमृतलाल सिंघवी, नाकोड़ा ट्रस्ट से हुलास बाफना व अन्य वरिष्ठ गण शामिल रहे।

जैन नवयुवक मंडल, महावीर युवक संघ, महिला मंडल, कन्या मंडल, वर्धमान स्कूल एवं जैन समाज के सभी संगठनों के सदस्य बड़ी संख्या में यात्रा में सम्मिलित हुए।

अग्नि संस्कार व श्रद्धांजलि

ओसवाल मुक्तिधाम पहुंचकर पूज्य शालीभद्र मुनि का अग्नि संस्कार पूर्ण धार्मिक विधि के साथ सम्पन्न किया गया।

मुखाग्नि संसारिक परिवारजनों एवं संघ के पदाधिकारीगणों द्वारा दी गई। इस दौरान चार लोगस्स का ध्यान कर साधु-संयमी परंपरा के अनुरूप श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

पूज्य श्री शालीभद्र मुनि की तपस्या, संयम और विराग की गाथा जैन समुदाय एवं समस्त समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

Viyasmani Tripaathi

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