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माता-पिता, समाज को कष्ट देने वाले धुन्धकारी हैं-आचार्य संदीप शरण
9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती । श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने मनुष्य में धार्मिक आस्था जागृत होती है। सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। भागवत मनुष्य को निर्भय बनाता है। मनुष्य ईश्वर का भय नहीं रखता इसीलिये दुःखी है। भागवत के भगवान इतने सरल हैं कि वे सबके साथ बोलने को तत्पर है किन्तु अपने स्वार्थो में लिपटा हुआ जीव तो जगत के स्वामी की भी उपेक्षा कर देता है। यह सद् विचार आचार्य संदीप शरण शुक्ल ने बेलगड़ी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सूत्रपात करते हुये व्यासपीठ से व्यक्त किया।
महात्मा जी ने कहा कि जो लोग माता पिता की बात नहीं मानते, समाज को कष्ट देते हैं ऐसे सभी लोग धुंधकारी है। कहा कि बिना ईश्वर के संसार अपूर्ण है। परमात्मा श्रीकृष्ण परिपूर्ण आनन्द स्वरूप है। भागवत शास्त्र का आदर्श दिव्य है। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा, स्वधर्म का त्याग नहीं किया फिर भी वे श्रीभगवान को प्राप्त करने में सफल रहीं। महात्मा जी ने कहा कि दुःख में जो साथ दे वह ईश्वर और सुख में साथ देना वाला जीव है। श्रीकृष्ण की वन्दना से पाप जलते हैं।
ज्ञान और वैराग्य का विश्लेषण करते हुये महात्मा जी ने कहा कि सात दिन के भीतर परीक्षित को मुक्ति मिली। निश्चित था कि ठीक सातवे दिन उनका काल आने वाला है किन्तु हम काल को भूल जाते हैं। वक्ता शुकदेव जी जैसा अवधूत और श्रोता परीक्षित जैसा अधिकारी हो तो मुक्ति मिल जाती है। कथा महिमा का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि भागवत कथा का आनन्द ब्रम्हान्नद से भी श्रेष्ठ है। योगी तो केवल अपना उद्धार करता है किन्तु सतसंगी साथ में आये सभी का उद्धार करते हैं।
देवर्षि नारद की वृन्दावन में भक्ति से भेंट, भक्ति का दुःख दूर करने के लिये नारद जी का उद्योग , भक्ति के कष्ट की निवृत्ति सहित अनेक प्रसंगो का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने महर्षि व्यास के भागवत रचना के परम और मंगलकारी उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
श्रीमती आशा शुक्ला और अष्टभुजा प्रसाद शुक्ल ने परिजन और श्रद्धालुओं के साथ कथा व्यास का विधि विधान से पूजन अर्चन किया। परमपूज्य रामचन्द्र शुक्ल, श्रीमती सरोज शुक्ला की स्मृति में आयोजित कथा में मुख्य रूप से दुर्गा प्रसाद शुक्ल, डॉ० जगदम्बा प्रसाद शुक्ल, डॉ. अम्बिका प्रसाद शुक्ल, अखिलेश कुमार शुक्ल अजय कुमार शुक्ल, आनन्द कुमार शुक्ल, विशाल शुक्ल, अभिषेक शुक्ल, आंजनेय शुक्ल, अमित शुक्ल, डॉ० मारूति शुक्ल, सर्वज्ञ शुक्ल, सूर्याश शुक्ल मंगलम शुक्ल, आदित्य शुक्ल, आराध्य शुक्ल, शिवाय शुक्ल, अच्युत गोविन्द शुक्ल के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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