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वंदे मातरम’ के 150 वर्ष: शांति निकेतन में गूंजी देशभक्ति की अलख

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा l विद्यालय मीडिया प्रभारी एवं एकेडमिक कोऑर्डिनेटर अयूब के. सिलावट ने बताया कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रातःकालीन प्रार्थना के समय हुए इस विशेष सामूहिक गायन में, बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
शांति निकेतन इंग्लिश मीडियम सीनियर सेकेंडरी स्कूल एक भव्य और भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। यह एक ऐसी रचना है जिसने स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माताओं की अनगिनत पीढ़ियों को प्रेरित किया है। यह भारत की राष्ट्रीय पहचान और का स्थायी प्रतीक है।
7 नवंबर 1875 को बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस अमर गीत के सम्मान में, विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं और स्टाफ ने सामूहिक गायन कर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश दिया।
विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय गीत का गायन करते हुए देश की एकता और अखंडता बनाए रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर, सभी ने संकल्प लिया कि जब भी मौका मिलेगा, वे देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने से पीछे नहीं हटेंगे।
प्रिंसिपल सुधा मदान ने छात्रों को ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह गीत मूल रूप से बंगाली में लिखा गया था और बाद में इसे हिंदी में भी अपनाया गया, जो आज भी भारत की एकता और राष्ट्रीय गौरव का स्थायी प्रतीक है।
प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर आरती गोयल ने बताया कि ‘वंदे मातरम’ पहली बार बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ के एक भाग के रूप में साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था। मातृभूमि को नमन यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता के प्रतीक के रूप में याद करता है और समाज के सभी वर्गों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित करता है।
छात्रों को विशेष रूप से बताया गया कि इस 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में, 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक अगले एक वर्ष तक विद्यालयों में प्रतिदिन सुबह प्रार्थना के समय राष्ट्रीय गीत का गायन किया जाएगा।

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