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कश्मीरी हस्तनिर्मित कालीनों की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन, नकली कालीनों की बिक्री पर जताई कड़ी आपत्ति

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
श्रीनगर, 24 जुलाई 2025 – जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री को आज एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में नकली कालीनों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। यह प्रतिनिधिमंडल प्रमुख व्यवसायी एवं कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) व भारतीय रेशम निर्यात संवर्धन परिषद (ISEPC) के निदेशक शेख आशिक के नेतृत्व में मिला।
श्री शेख आशिक, जो कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं, के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विदेशी मशीन से बने कालीन कश्मीर के शोरूमों में “हथकरघा”, “विरासत” और “हस्तशिल्प” के नाम पर बेचे जा रहे हैं। इससे न केवल ग्राहकों को भ्रमित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका और कश्मीरी कालीन उद्योग की वैश्विक साख पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में फैज़ निसार (सीईपीसी क्षेत्रीय प्रभारी), फिरदौस अहमद, फैयाज़ अहमद वानी (केसीसीडीओ प्रतिनिधि), गुलाम नबी डार (मीरास कार्पेट वीवर्स कोऑपरेटिव), और फारूक अहमद शाह (केसीएमए महासचिव) जैसे प्रमुख उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल थे।
मुख्य मांगें:
सभी पंजीकृत हस्तशिल्प शोरूमों में मशीन से बने कालीनों की बिक्री पर प्रतिबंध
केवल प्रमाणित हस्तनिर्मित कालीनों की बिक्री के स्पष्ट संकेत
निरीक्षण और कार्रवाई के लिए संयुक्त प्रवर्तन बल का गठन
विदेशों से आने वाले नकली कालीनों पर उच्च आयात शुल्क
उपभोक्ताओं में भरोसा बहाल करने और स्थानीय कारीगरों को संरक्षण
शेख आशिक का भावुक संदेश:
“हमारे हस्तनिर्मित कालीन कश्मीर की संस्कृति की आत्मा हैं। नकली कालीनों की बिक्री न केवल कारीगरों के जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि हमारी विरासत को भी खतरे में डाल रही है।”
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से इस संकट को केवल एक आर्थिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक आपदा मानते हुए शीघ्र नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कश्मीर की पहचान और हज़ारों कारीगर परिवारों की गरिमा को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

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