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समाज सुधारक व क्रांतिकारी महात्मा ज्योतिबा फुले की धूमधाम से मनाई जयंती 

ज्योतिबा फुले ने जातिगत भेदभाव, छुआछूत, महिला शिक्षा और सशक्तिकरण में निभाई अहम भूमिका

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

 

नारनौल, 11अप्रैल

आज महान समाज सुधारक, लेखक, दार्शनिक, विचारक और समाज में व्याप्त कुरूतियों के निवारण में हमेशा संघर्षरत रहने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती का आयोजन सर्व अनुसूचित जाति संघर्ष समिति व गुरु रविदास महासभा के संयुक्त तत्वावधान में महासभा के प्रधान बलबीरसिंह बबेरवाल की अध्यक्षता में किया गया । समारोह के मुख्य अतिथि संघर्ष समिति के प्रमुख सलाहकार एवं धानक समाज के प्रमुख समाजसेवी शिवनारायण मोरवाल रहें। समारोह में सर्व प्रथम समिति के सदस्य लोकराम ढ़ैणवाल के निधन व उन्हानी में स्कूल बस पलटने से बच्चों की हुई दर्दनाक मौत पर शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन धारण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात जयंती समारोह में समिति सदस्यों ने महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए गए । बैठक का संचालन करते हुए समिति के समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के प्रमुख सलाहकार बिरदी चंद गोठवाल ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र राज्य के सतारा के शोषित समाज में हुआ । महात्मा ज्योतिबा फुले एक प्रमुख सामाजिक सुधारक, शिक्षाविद और दार्शनिक थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के दौरान छुआछूत, जातिगत भेदभाव, महिला शिक्षा और सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । फुले ने 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की । छूआछूत के उस दौर में इन्हें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने मिशन से पीछे नहीं हटे और महिलाओं व समस्त वंचित समाज के लिए शिक्षा की ज्योति जलाई ।

 समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, महासभा के प्रधान बलबीरसिंह बबेरवाल, प्रमुख सलाहकार लाला राम नाहर, समिति के मुख्य प्रवक्ता एवं हरियाणा प्रदेश चमार महासभा के प्रधान अनिल फाण्डन, धानक समाज के प्रमुख समाजसेवी एवं पूर्व डीजीएम महेंद्र सिंह खन्ना, पूर्व मैनेजर हरफूलसिंह, कोषाध्यक्ष प्यारेलाल चवन, शिवनारायण मोरवाल आदि ने भी महात्मा फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फुले ने सामाजिक कुरीतियों का निवारण करने के लिए बाल विवाह के प्रति समाज को शिक्षित और उन्मूलन करने, सती प्रथा के खिलाफ प्रचार करने व विधवा पुनर्विवाह के लिए पूरजोर वकालत की । महाराष्ट्र के सामाजिक सुधार आंदोलन का एक प्रमुख व्यक्तित्व उन्हें डॉ भीमराव अंबेडकर, अन्नाभाऊ साठे की पसंद के साथ दलित मंगल जाति का प्रतीक माना जाता है । फुले ने जातिगत भेदभाव और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने में सक्रिय रूप से भूमिका निभाई ।

            इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि सभा के प्रधान जोगेंद्र जैदिया, उपाध्यक्ष राजेश चांवरिया, कोली समाज के प्रधान तोता राम, प्रदेश कोषाध्यक्ष रामकुमार ढै़णवाल, खण्ड प्रधान रोहतास बबेरवाल, सचिव सुमेर सिंह गोठवाल, पूर्व चीफ मैनेजर, विजय सिरोहा, पूर्व अधीक्षक दयानंद सांवरिया, पूर्व मैनेजर जयपाल सिंह, रामशरण हुडीना, रामचंद्र गोठवाल, बलबीरसिंह हुडीना, ठेकेदार गजेन्द्र सिंह थाना, शेर सिंह महारानियां, रामनिवास , कन्हैयालाल , रामचंद्र ग्रोवर, शेर सिंह, सूबे सिंह गोठवाल, धर्मवीर कटारिया, सुरेन्द्र सिहमा, रामभरोस भीम, हजारीलाल खटावला, आदि अनेक लोग उपस्थित रहे ।

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

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