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महिला हो या पुरूष यदि यौन शोषण हो रहा है तो वे डरें नहीं शोषणकर्ता के विरुद्ध आवाज बुलंद करे: अधिवक्ता गिरीबाला

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

नारनौल। राजकीय महाविद्यालय नारनौल में यूथ रेडक्रॉस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से तथा महाविद्यालय प्राचार्य डॉ पूर्ण प्रभा की अध्यक्षता में ‘यौन शोषण के विरुद्ध संघर्ष का विश्व दिवस’ के रूप में मनाया गया ।

जिला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिवक्ता गिरीबाला यादव ने विधार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को यौन शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करना हैं।

भारत सरकार द्वारा इस प्रकार के शोषण के लिए कठोर कानून बनाएं हुए हैं। जिला महेंद्रगढ़ में कार्य स्थल पर यौन शोषण हो रहा है तो डरें नहीं, शोषणकर्ता के विरुद्ध आवाज बुलंद करनी चाहिए उसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा निशुल्क विधिक सेवा प्रदान की जाती है। पिछले कुछ सालों में हरियाणा राज्य विशेषकर जिला महेंद्रगढ़ में यौन उत्पीड़न या यौन शोषण से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। हमारे देश में स्थिति बहुत ही भयानक है। आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में हर दिन यौन शोषण के लगभग 100 केस आते हैं ।

उन्होंने कहा कि यौन शोषण का शिकार कोई भी हो सकता है चाहे वो पुरुष हो या महिला। यही नहीं, किसी भी उम्र के लोग इसका शिकार बन सकते हैं। यौन शोषण का शिकार होने के बाद अधिकतर लोग इसे लेकर चुप रहते हैं। दुनियाभर में आज का दिन यौन शोषण के विरुद्ध संघर्ष का विश्व दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्राचार्य डॉ पूर्ण प्रभा ने बताया कि दुनियाभर में महिलाओं और बच्चों के साथ रोजाना कई प्रकार के यौन शोषण के मामले सामने आते रहते हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि हर दिन औसतन आठ महिलाएं, लड़कियां और अक्सर युवा लड़कों का यौन शोषण किया जाता है। दुनियाभर में आज का दिन यौन शोषण के विरुद्ध संघर्ष का विश्व दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस मौके पर यूथ रेडक्रॉस के नोडल अधिकारी डॉ चंद्र मोहन ने विधार्थियों को यौन शौषण के प्रति बुलंद आवाज़ करने की जागरूकता शपथ दिलवाई।

प्रोफेसर डॉ मुकेश कुमारी यादव ने विधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यौन हिंसा के परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति में मानसिक तनाव, सतर्कता बढ़ना, नींद की कमी, भय, घबराहट, चिंता, विश्वास की कमी, आत्महत्या भावना, आत्म-निर्भरता की कमी, विवशता, गुस्सा, विश्वास का नष्ट होना, विचारों में चकराना, आत्मसम्मान की कमी और मानसिक संतुलन की हानि जैसी असामान्य स्थितियां देखी जा सकती हैं।

महाविद्यालय उपप्राचार्य डॉ जगजीत सिंह मोर ने बताया कि यौन हिंसा व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन, परिवारिक संबंध, सामाजिक संबंध और पेशेवर जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस मौके पर महाविद्यालय कुल सचिव डॉ सत्य पाल सुलोदिया, प्रोफेसर अमित कुमार, प्रोफेसर संजय तंवर, डॉ मनोज कनोजिया ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका अदा की। सभी अतिथियों, स्टाफ सदस्यों का डॉ कपिल देव ने धन्यवाद किया।

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

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