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सरिस्का के भूखे टाइगर एसटी 2303 ने नीलगाय का किया शिकार

मुंह को छोड़कर पूरे शरीर का मांस खाया, रायपुर गांव में मिले अवशेष

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

 

नारनौल/बहरोड़। सरिस्का के कई दिनों से भूखे टाइगर एसटी 2303 ने नीलगाय का शिकार किया है। टाइगर ने शिकार के बाद पुरे मांस को खाया। जिसके अवशेष ततारपुर के पास रायपुर गांव में सरसों के खेत में मिले हैं। वन कर्मियों को एक दिन पहले राणौठ गांव में टाइगर के पगमार्क मिले थे । उसके अगले ही दिन रायपुर गांव में नीलगाय के अवशेष मिले हैं। नीलगाय के मुंह को छोड़कर बाकी पूरे शरीर के मांस को टाइगर ने खा लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टाइगर कई दिनों से भूखा था, इस कारण पूरा मांस खा गया।

सरिस्का का टाइगर एसटी 2303 करीब 2 महीने से सरिस्का जंगल से बाहर है। 18 जनवरी से टाइगर के पीछे वन कर्मियों की टीम है। जब भिवाड़ी के खुशहेड़ा गांव के किसान पर टाइगर ने हमला किया। उसके बाद वनकर्मी टीम टाइगर के पीछे-पीछे हैं । चाहे वह हरियाणा में गया या वापस राजस्थान में आया। जहां भी पगमार्क मिलते हैं टीम वहीं पहुंच जाती है । पर टाइगर आगे निकल जाता है। वन कर्मियों की टीम इसलिए सफल नहीं हो पाई की टाइगर दिन में सरसों के खेतों में छिप जाता था और रात को मूवमेंट करता था। टाइगर ने अब तक लगभग 300 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर लिया है।

हरियाणा के रेवाड़ी के आसपास से टाइगर का वापस आना एक सुखद समाचार है। जो अब बफर जोन के जंगल से कुछ किलोमीटर दूरी पर है।

पहली बार टाइगर का खाया पशु मिला। 18 जनवरी के बाद टाइगर हरियाणा के रेवाड़ी जिला के धारुहेड़ा के गांवों तक पहुंच गया था। वहां बॉर्डर के गांव में एक वनपाल पर हमला किया, लेकिन वनपाल बच गया। वनपाल गंभीर घायल हो गया जो अभी भी उपचाराधीन है। सुखद बात यह है कि उसके बाद टाइगर हरियाणा से बहरोड़ (अलवर) की सीमा की तरफ आया। इस समय खेतों में सरसों होने के कारण टाइगर की साइटिंग बहुत कम जगह पर हुई। अधिकतर पगमार्क के आधार पर ही टीम पीछे है।

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

Satish Kumar

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