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ब्रह्माकुमारीज् पन्ना में ’’गीता जयंती’’ का हुआ भव्य आयोजन
गीता सिर्फ किताबों में नहीं बल्कि हमारे जीवन में भी दिखाई दे* *ब्रह्माकुमारी बहनजी

लोकेशन=पन्ना
ब्यूरो चीफ=सुधीर अग्रवाल
जीवन मूल्यो का स्त्रोत है गीता… ब्रम्हाकुमारी बहन जी
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, पन्ना में गीता जयंती के पावन पर्व पर ‘‘सफल जीवन का आधार – गीता का सार‘‘ के सुन्दर विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परमपिता परमात्मा की याद एवं दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी सीता बहनजी ने गीता ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, गीता सर्व शास्त्रमई शिरोमणि गायी हुई है।
गीताज्ञान हमारा जीवन बने, गीता से हम जुडे़ रहें और गीताज्ञान दाता हमारे लिए छत्रछाया बन जाए – इन्हीं शुभकामनाओं के साथ श्रीमद्भगवतगीता पूरे जनमानस के लिए स्वयं परमात्मा द्वारा वरदान रूप में प्राप्त ज्ञान सरिता है, ज्ञान गंगा है। गीता हमें एकजुटता सिखाती है। जब मनुष्य ’किंकत्र्तव्यविमूढ़’ हो जाता है, तो गीता उसे जीवन में कत्र्तव्यबोध को जागृत कर सन्मार्ग पर अग्रसर करती है।
गीता ही एकमात्र ऐसा शास्त्र है जिसमें भगवानुवाच शब्द का प्रयोग हुआ है अर्थात् यह स्वयं परमात्मा द्वारा दिया हुआ सच्चा ज्ञान है, परन्तु आज हम गीता के भगवान ज्योति बिन्दु परमपिता परमात्मा को भूल गए हैं, जो परमधाम का वासी है और आज यह गति हुई कि, चारों ओर पापाचार, दुराचार और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आज आवश्यकता इस बात की है कि, हम सर्वआत्माओं के परमपिता परमात्मा को पहचानें, जो जन्म मरण से न्यारा है, जो कल्प के अंत में आकर हम सब को गीता ज्ञान देते हैं। वास्तव में आज हम सब अर्जुन हैं और हमारे ही जीवन में अच्छाई, बुराई, सकारात्मकता, नकारात्मकता तथा सत्कर्म, विकर्म के बीच द्वंद युद्ध चलता रहता है और गीता ज्ञान दाता परमात्मा से विमुख हो हम गलत राह पर चल पड़ते हैं, तब कलयुग के अंत और सतयुग के आदि में परमपिता परमात्मा गीता में दिए अपने वायदे के अनुसार साधारण स्वरूप में आते हैं और ज्ञान यज्ञ रचते हैं जो उन्हें पहचान उनके बताए मार्ग और उनकी श्रीमत पर चलता है वह सतयुगी दैवी दुनिया में जाता है –
प्रत्येक मनुष्य के मन में कुविचार और सुविचार होते हैं यही कौरव, पाण्डव की तरह मन के अन्दर ही अन्दर महाभारत युद्ध लड़ते रहते हैं। कभी कुवृत्तियां जीत जाती हैं तो कभी सद्वृत्तियां बुरे विचारों को परास्त कर देती हैं। यह शरीर ही प्रत्येक मनुष्य का रथ है जिसका रथी आत्मा युद्धरत् अर्जुन की तरह है। जो मनुष्य इस रथ और रथी ’सारथी’ परमात्मा को बनाता है उसे जीवनसफर में कोई हरा नहीं सकता।
आगे बहनजी ने कहा कि, गीता का ज्ञान हर धर्म के लिए है। हर मानव के कल्याण की राह श्रीमद्भगवतगीता में समाई हुई है।
कार्यक्रम में श्रीमति मंजुलता जैन (एडबोकेट), बुद्ध सिंह जी (गायत्री परिवार), श्रीमति कविता लालवानी (संत निहंकारी मिशन) सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे तथा सभी ने कार्यक्रम की सराहना की एवं अपने-अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में बहनजी ने सभी को अपने जीवन में निरहंकारी, धैर्यवान, क्रोधमुक्त, आलस्य मुक्त, बनने एवं बदला न ले बदलकर दिखाने, परमात्मा की श्रीमत पर चलने की प्रतिज्ञा करायी।

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