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ग्राम चचोर में आज खेड़ा देव का पूजन किया गया

रिपोर्ट दशरथ माली चचोर
चचोर ।तहसील। रामपुरा। जिला नीमच। मध्य प्रदेश । जैसे-जैसे फसल को पानी की आवश्यकता होती है। इसीलिए,किसान इंद्रदेव को मनाने का सबसे सरल और आसान रास्ता मानता हे। कि कई वर्षों से हजारों सालों से उज्जैनी मनाई जाती है।। जिससे इंद्र देवता को मनाने का सबसे सरल रास्ता है ।जिससे इंद्रदेव प्रसन्न होकर एक तरफ ग्राम वासियों द्वारा उज्जैनी मनाई जाती है जहां उज्जैनी के रूप में सभी ग्रामवासी अपने घर से बाहर जंगल में दाल बाटी मनाते हैं और दाल बाटी का भोग लगाते हैं इंद्र देवता को। जिससे इंद्र देवता प्रसन्न होकर। इंद्रदेव सभी लोगों की मनोकामना पूरी करते हुए लगभग लगभग 80% ऐसा कभी-कभी होता है कि उज्जयिनी के दिन ही बरसात हो जाती हैं। जिससे उज्जैनी का फल माना जाता है और ग्राम वासियों में खुशी की लहर होती हैं इसी कड़ी में देवताओं को मनाने के लिए कई रीति रिवाज पूरे किए जाते हैं इन्हीं रीति-रिवाजों में उज्जैनी से 2 या 3 दिन पहले खेड़ा देवत का पूजन किया जाता है जो पुराने कई वर्षों से जंगल में, पहाड़ पर, या किसी पुराने मंदिरों में बैठे हैं, इन सभी देवताओं को मनाने का कार्य किया जाता है, और इनका पूजन किया जाता है इन्हीं को खेड़ा देव कहते हैं। और फिर उसके दो या तीन दिन बाद उज्जैनी मनाई जाती है। तो आज ग्राम चचोर में खेड़ा देव का पूजन किया गया है। जिसमें सराहनीय सहयोग रहा ग्राम के पंडित, माननीय मांगीलाल जी पांडे, घासीलाल जी रावत, प्रहलाद जी पाटीदार ,घनश्याम जी प्रजापत, हरि सिंह जी रावत, राकेश जी माली, बलराम जी सेन, मोतीलाल जी धनगर,मोहनलाल जी बारेठ, व अन्य गणमान्य नागरिकों का सराहनीय सहयोग रहा


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