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बीकानेर भाजपा में टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी खींचतान की चर्चा, कई दिग्गज नेताओं की पैरवी भी नहीं आई काम!

जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज, जयपुर की बैठक से लेकर स्थानीय स्तर तक गुटबाजी की चर्चाएं

 

बीकानेर से डॉ. राम दयाल भाटी की रिपोर्ट।

बीकानेर। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर भाजपा में टिकट वितरण के बाद अंदरूनी सियासत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, जयपुर में हुई टिकट चयन संबंधी बैठक में कई सीटों को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद देखने को मिले। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अर्जुनराम मेघवाल और बिहारी विश्नोई के बीच खींचतान की चर्चा

सूत्रों का दावा है कि जयपुर में आयोजित बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई के बीच कई टिकटों को लेकर सहमति नहीं बन पाई। चर्चा है कि मामला इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री को बीच-बचाव करते हुए हस्तक्षेप करना पड़ा।

वहीं, विधायक और विधायक प्रत्याशियों के साथ टिकटों को लेकर कथित खींचतान के चलते लूणकरणसर और नोखा से जुड़े महेश मूंड तथा कन्हैया लाल सियाग को खाजूवाला क्षेत्र में शिफ्ट किए जाने की बात भी सामने आ रही है।

जालम सिंह भाटी की पुत्रवधू के टिकट को लेकर भी चर्चाएं

भाजपा देहात के पूर्व जिलाध्यक्ष जालम सिंह भाटी, जो अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं, को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

सूत्रों के अनुसार, वे अपनी पुत्रवधू के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन स्थानीय विधायक के कथित विरोध के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद उन्होंने पार्टी द्वारा पहले ही बहुत कुछ दिए जाने की बात कहते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।

इसी प्रकरण में सह-प्रभारी आईदान सिंह भाटी की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने उन्हें टिकट संबंधी पैरवी में संयम बरतने की सलाह दी।

पाना देवी के नाम की चर्चा से भी गरमाई राजनीति

टिकट वितरण से पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की धर्मपत्नी पाना देवी को जिला परिषद चुनाव लड़ाने संबंधी कथित सुझाव भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व जिलाध्यक्ष की ओर से दिए गए इस सुझाव को लेकर राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में संबंधित नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नोखा में शिवराज विश्नोई की पैरवी की चर्चा

नोखा की जिला परिषद सीटों को लेकर भी भाजपा के भीतर सियासी समीकरण चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, शिवराज विश्नोई के पक्ष में मिथिलेश गौतम ने जोरदार पैरवी की, लेकिन प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई के प्रभाव के चलते उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी।

वहीं, पंचायत समिति टिकटों के अंतिम चयन में मुख्यमंत्री द्वारा प्रभारियों और संबंधित विधायकों को महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की बात सामने आ रही है।

कोलायत में जयवीर सिंह भाटी को टिकट नहीं मिलने की चर्चा

कोलायत पंचायत समिति की एक सीट पर जयवीर सिंह भाटी के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल द्वारा जयपुर में मुख्यमंत्री के समक्ष पैरवी किए जाने की चर्चा है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, इस प्रयास के बावजूद टिकट को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

बताया जा रहा है कि टिकट नहीं मिलने की जानकारी सामने आने के बाद जयवीर सिंह भाटी समर्थक खेमे में हलचल बढ़ गई। कुछ समर्थकों द्वारा अंतिम समय में नामांकन वापस लेने और कुछ लोगों द्वारा टिकट लौटाने की बात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

लूणकरणसर में सारस्वत ब्राह्मण समाज के टिकटों को लेकर नए समीकरण

लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जिला परिषद सीटों पर सारस्वत ब्राह्मण समाज के दावेदारों को टिकट नहीं मिलने की चर्चाओं ने भी राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में इस समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने के चलते समाज के एक वर्ग का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। यदि ऐसा होता है तो क्षेत्र के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

तोलाराम कूकणा के नामांकन को लेकर भी रही हलचल

बीकानेर पंचायत समिति से तोलाराम कूकणा और हदां पंचायत से एक अन्य प्रत्याशी के नामांकन पर कथित आपत्तियों को लेकर भी राजनीतिक हलचल रही।

सूत्रों का दावा है कि नामांकन खारिज होने की आशंका के बीच भाजपा स्तर पर सक्रियता दिखाई गई और अंततः तोलाराम कूकणा का नामांकन बच गया।

तोलाराम कूकणा को बीकानेर पंचायत समिति में भाजपा की ओर से प्रधान पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीकानेर पंचायत समिति की कोलायत विधानसभा क्षेत्र में आने वाली सीटों पर टिकट वितरण को लेकर कोलायत और खाजूवाला के विधायकों के बीच समन्वय की चर्चा है। इसे कूकणा की प्रधान पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में कूकणा को मंत्री सुमित गोदारा के विरोधी खेमे और विधायक विश्वनाथ के नजदीक माना जाता है।

टिकट वितरण के बाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर नजर

बीकानेर में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के टिकट वितरण को लेकर सामने आ रही इन चर्चाओं ने स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अब देखना होगा कि टिकटों को लेकर कथित असंतोष चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है और भाजपा अपने विभिन्न स्थानीय गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित कर पाती है।

नोट: यह समाचार राजनीतिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं पर आधारित है। संबंधित नेताओं के बीच कथित मतभेद, टिकटों की पैरवी और अन्य अंदरूनी घटनाक्रमों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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