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कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में मशरूम उत्पादन तकनीक पर 5 दिवसीय रोजगारपरक प्रशिक्षण शुरू

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। आचार्य नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-III, कानपुर से वित्त पोषित ‘सरल परियोजना’ के तहत मशरूम उत्पादन तकनीक विषय पर पांच दिवसीय रोजगारपरक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती के प्रभारी अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्रा ने की। उन्होंने मशरूम उत्पादन को कम लागत, कम स्थान और कम समय में रोजगार एवं आय का प्रभावी माध्यम बताते हुए ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. मिश्रा ने प्रतिभागियों को धान एवं गेहूं के भूसे जैसे कृषि अवशेषों के मशरूम उत्पादन में उपयोग, उत्पादन इकाई की स्थापना, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन तथा मशरूम उत्पादन के बाद बचे अवशेषों के कम्पोस्ट और जैविक खाद के रूप में उपयोग की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. प्रेम शंकर, वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) ने प्रतिभागियों का पूर्व-मूल्यांकन किया। उन्होंने बटन मशरूम की उत्पादन तकनीक, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन, भूसे का उपचार एवं पाश्चुरीकरण, बैग तैयार करने, स्पॉनिंग, इनक्यूबेशन, फलन तथा कीट-रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. वी.बी. सिंह, वैज्ञानिक (पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी) ने मशरूम की उपयुक्त प्रजातियों के चयन और गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की पहचान के बारे में बताया। उन्होंने स्पॉन की गुणवत्ता के प्रमुख लक्षणों तथा बेहतर उत्पादन एवं उपज में गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं डॉ. अंजलि वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने मशरूम में मौजूद प्रोटीन, खनिज एवं अन्य पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए सुरक्षित प्रसंस्करण एवं भंडारण की तकनीक समझाई। उन्होंने मशरूम पाउडर, अचार, नमकीन सहित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की विधि बताई और कहा कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय के साथ महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
श्री आर.वी. सिंह, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) ने मशरूम उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपनाने, लागत एवं लाभ का आकलन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, स्थानीय बाजार से जुड़ाव तथा प्रशिक्षण के बाद उद्यम स्थापित करने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन को पोषण, रोजगार, स्वरोजगार और आय सृजन से जोड़ते हुए वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकासखंडों से 25 नवयुवक एवं युवतियों ने प्रतिभाग किया।

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