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आंसुओं के सैलाब में आज पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी को दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि
पूर्वांचल के मालवीय की जीवन यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में बनी प्रेरणास्रोत, ग्रामीण अंचल में शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर जगाई शिक्षा की अलख

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती/संतकबीरनगर (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। पूर्वांचल के मालवीय कहे जाने वाले शिक्षाविद् पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी की आठवीं पुण्यतिथि शनिवार, 3 अक्टूबर को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। इस अवसर पर परिजन, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी और उनके शुभचिंतक नम आंखों से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। पुण्यतिथि को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी उन व्यक्तित्वों में शुमार रहे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के अभाव को नजदीक से महसूस किया और अपना जीवन शिक्षण संस्थानों की स्थापना तथा युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए समर्पित कर दिया।
सन् 1950 में संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के ग्राम भिटहा में जन्मे पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी के पिता पंडित अम्बिका प्रताप नारायण चतुर्वेदी और माता चन्द्रकली देवी थीं। मात्र पांच वर्ष की उम्र में पिता का निधन हो जाने के बाद उनका पालन-पोषण माता तथा बड़े भाइयों वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी और गोमती प्रसाद चतुर्वेदी के स्नेह और संरक्षण में हुआ।
वे मेधावी विद्यार्थी थे। उन्होंने स्नातक की शिक्षा हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज, खलीलाबाद से, परास्नातक की शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय से तथा बीएड की शिक्षा रतन सेन डिग्री कॉलेज, बांसी से प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने समाज और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से समझा।
ग्रामीण अंचल में बच्चों को शिक्षा से वंचित देखकर उन्होंने महज 30 वर्ष की उम्र में वर्ष 1980 में अपने पैतृक गांव के समीप ग्राम परवता में बाबा पर्वतनाथ इंटर कॉलेज की स्थापना की। यहीं से उनके शैक्षणिक अभियान की शुरुआत हुई। उन्होंने शिक्षा की इस छोटी सी पौध को आगे चलकर वटवृक्ष बनाने का संकल्प लिया और जीवनभर उसे पूरा करने में जुटे रहे।
वर्ष 2002-03 में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अभाव को महसूस करते हुए पंडित अम्बिका प्रताप नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डुमरी हरिहरपुर, संतकबीरनगर की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके प्रयासों से जिले में अनेक उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई, जहां बीकॉम, बीएससी, एमकॉम, एमएससी, बीपीएड, बीएड, बीटीसी और एमएड सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की शिक्षा उपलब्ध हुई। इससे संतकबीरनगर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के युवाओं को उच्च शिक्षा का अवसर मिला।
बस्ती में भी जगाई शिक्षा की अलख
संतकबीरनगर में शैक्षणिक गतिविधियों को विस्तार देने के बाद पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी ने बस्ती जिले की ओर रुख किया। सीमित संसाधनों और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वर्ष 2006-07 में बस्ती जनपद मुख्यालय के समीप ग्राम जामडीह में जीएसपीजी कॉलेज की स्थापना की। इसके बाद बस्ती शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी विभिन्न शिक्षण संस्थानों की स्थापना का सिलसिला आगे बढ़ा।
उनका मानना था कि किसी भी समाज के विकास की मजबूत नींव शिक्षा से ही रखी जा सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया।
राजनीति में भी रही सक्रिय भूमिका
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के साथ पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने अपने भतीजे दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष बनने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों को भी सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
विधानसभा चुनाव में उनके भतीजे जय चौबे के खलीलाबाद से विधायक निर्वाचित होने के पीछे भी उनके मार्गदर्शन और राजनीतिक सक्रियता की चर्चा होती रही। उन्होंने परिवार को एकजुट रखते हुए सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
परिवार ने संभाली विरासत
पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी के निधन के बाद उनके परिवार के सदस्यों ने उनके शैक्षणिक सपनों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा। उनके पुत्र डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी तथा अजय प्रताप नारायण उर्फ राकेश चतुर्वेदी विभिन्न शिक्षण संस्थानों के संचालन से जुड़े हैं। परिवार की बेटियां और बहुएं भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
उनके सपनों को आगे बढ़ाते हुए परिवार द्वारा शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ अस्पताल और अन्य सामाजिक संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि संस्थानों का निरंतर विकास और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना ही पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी का जीवन इस बात की मिसाल रहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने और अनेक शिक्षण संस्थानों की स्थापना के उनके प्रयास आज भी विद्यार्थियों और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उनकी आठवीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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