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हरिद्वार में पितृपक्ष के अवसर पर निशुल्क भंडारा सेवा

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
दिनांक: 26 सितंबर 2026
हरिद्वार। मानव जीव दया सेवा समिति द्वारा पितृपक्ष के अवसर पर हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी के पास दो दिवसीय निशुल्क भोजन भंडारा सेवा का शुभारंभ किया गया। इस सेवा के दौरान साधु-संतों, जरूरतमंदों, गरीब एवं असहाय लोगों को भोजन, मिष्ठान, फल-फ्रूट एवं दक्षिणा प्रदान कर सेवा की गई।
मानव जीव दया सेवा समिति के अध्यक्ष हीरालाल प्रजापति ने बताया कि पितृपक्ष में श्रद्धा एवं सेवा भाव से किए गए दान-पुण्य को हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में माना जाता है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करवाना मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि “आपका छोटा-सा सहयोग किसी जरूरतमंद की खाली थाली को भोजन से भर सकता है। आइए, मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।” भोजन दान, जरूरतमंद परिवारों की सहायता तथा नेत्रहीन, असहाय एवं दिव्यांगजनों की मदद के माध्यम से मानव सेवा के इस अभियान को आगे बढ़ाया जा सकता है।
विभिन्न स्थानों पर भोजन सेवा
इस अवसर पर स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय, हाई स्कूल, सप्त सरोवर, हरिद्वार तथा अंध विद्यालय एवं आश्रम, गौशाला सहित अन्य क्षेत्रों में बालक-बालिकाओं को निशुल्क भोजन कराया गया।
इसके साथ ही बाबा काली कमली वाला पंचायत क्षेत्र, हरिद्वार-ऋषिकेश में साधु-संतों एवं महात्माओं के लिए निशुल्क भोजन सेवा की गई। जय भारत साधु महाविद्यालय, श्रवणनाथ मठ, श्री श्री 1008 रघुनाथ जी महंत, तथा श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर, हर की पौड़ी, हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों पर भी भोजन सेवा आयोजित की गई।
इस सेवा कार्य में भामाशाह मंजू देवी जीवाराम जी, धनवा वाले प्रजापति सहित अनेक श्रद्धालुओं एवं सेवाभावी लोगों का सहयोग रहा।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
भोजन सेवा के दौरान शंकरलाल प्रजापति, श्रीमती धनी देवी, हीरालाल प्रजापति, श्रीमती बदामी देवी, बिन्जाराम, श्रीमती कमला देवी, श्री ओमप्रकाश, चंपालाल, नेमाराम, भगवान राम, मंजू देवी, आशा देवी, माजीवाला सहित अनेक श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।
मानव जीव दया सेवा समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा का यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
मानव सेवा ही माधव सेवा है।
आइए, मानवता के मार्ग पर चलते हुए जरूरतमंदों का सहारा बनें।

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