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सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस: बढ़ती जीवनशैली के बीच एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या – डॉ. नवीन सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। आधुनिक जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग तथा गलत बैठने की आदतों के कारण सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस (गर्दन दर्द) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस संबंध में जानकारी देते हुए आस्था आयुर्वेदिक हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि यह बीमारी गर्दन की हड्डियों एवं उपास्थियों में होने वाली घिसावट के कारण उत्पन्न होती है, जिसे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस या नेक आर्थराइटिस भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यह समस्या सामान्यतः उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखने को मिलती है, विशेषकर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में। हालांकि आजकल युवाओं में भी लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने, तनाव और अत्यधिक स्क्रीन उपयोग के कारण यह रोग तेजी से फैल रहा है।
डॉ. सिंह के अनुसार, इस रोग के प्रमुख लक्षणों में गर्दन में दर्द और जकड़न, सिर के पीछे दर्द, गर्दन हिलाने पर आवाज आना, हाथों और उंगलियों में सुन्नता या कमजोरी, कंधों में अकड़न तथा संतुलन बिगड़ना शामिल हैं। कई बार खांसने, छींकने या गर्दन पीछे मोड़ने पर दर्द बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि रोग की पहचान के लिए एक्स-रे, एमआरआई एवं नर्व कंडक्शन टेस्ट जैसे परीक्षण किए जाते हैं। समय रहते सही जांच और उपचार आवश्यक है, अन्यथा यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
उपचार के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर, गर्म और ठंडी सिकाई तथा नियमित हल्के व्यायाम से काफी राहत मिलती है। इसके साथ ही सही मुद्रा में बैठना, लंबे समय तक मोबाइल/कंप्यूटर से बचना, कैल्शियम एवं विटामिन-बी युक्त आहार लेना तथा पीठ के बल सोना लाभकारी होता है।
अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि हाथों में सुन्नता, कमजोरी या चलने में असंतुलन जैसी समस्या महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और लापरवाही न बरतें।

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