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यह सारे फल करते हैं आपके साथ ब्लड को भी फ्रेश – डॉ. अर्चना दुबे

वेदान्त सिंह की रिपोर्ट
आज के आधुनिक दौर में भोजन, पानी मौ और हवा इस हद तक प्रदूषित हो गए हैं कि लाख सावधानी बरतने के बावजूद इनके जरिए शरीर में हानिकारक व अनावश्यक तत्व चले ही जाते हैं और ये ब्लड में मिलकर ब्लड की नेचुरल क्रियाओं को प्रभावित करने लगते हैं। ब्लड में हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ जाने के कारण मुंहासे, दाग-धब्बे, झांइयां आदि समस्याओं से लेकर सिर दर्द, तनाव, थकान, लिवर में गड़बड़ी व अन्य कई रोगों की उत्पत्ति होती है। अतः ब्लड की क्वालिटी को लेकर सजग रहना बेहद जरूरी है।
शरीर को निरोग रखने के लिए ब्लड के साथ मिले हुए विषैले तत्वों को बाहर निकालना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि शरीर में ऑक्सीजन व पौष्टिक तत्वों का सही रूप में संचार होता रहे। उपवास इस दिशा में सबसे अच्छा और आसान उपाय है। अतः सप्ताह में 1 दिन का उपवास रखें। सप्ताह में 1 दिन भोजन न करना या पूरी तरह से फल, जूस आदि पर रहना शरीर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपवास की अवधि में शरीर की ऊर्जा का इस्तेमाल इम्यून सिस्टम व मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को दुरुस्त करने में होता है, साथ ही इससे शरीर में जमी व्यर्थ ऊर्जा का भी उपयोग होता है। उपवास के दौरान शरीर के भीतरी अंगों को पूरी तरह रिलैक्स मिलता है, जिससे वे अपनी सफाई कर पाते हैं और ब्लड भी शुद्ध हो जाता है।
शरीर से पसीना निकलना भी बहुत जरूरी है। अतः शारीरिक मेहनत, एक्सरसाइज आदि से रोजाना पसीना बहाएं। शरीर से पसीना निकलते रहने से ब्लड शुद्ध होता है।
अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए सूर्योदय से पहले उठना और रात में जल्दी सोना तथा गहरी नींद का आनंद लेना जरूरी है। दरअसल जब फेफड़े, हृदय, गुर्दे आदि स्वस्थ रहते हैं, तो ब्लड में विषैले तत्वों का जमाव जल्दी नहीं हो पाता है और होता भी है, तो ये बाहर निकलते रहते हैं।
अपने खान-पान संबंधी आदतों में बदलाव लाकर भी हम ब्लड में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकाल सकते हैं। अधिक भारी भोजन, जैसे घी, तेल व मसालों वाले पदार्थ न खाएं, भरपूर मात्रा में पानी पिएं और जहां तक हो सके जंक फूड लेने से बचें।
. सुबह में खाली पेट 1 गिलास गुनगुने पानी में आंवले का रस और शहद मिलाकर पीने से ब्लड फ्रेश होता है।
10 मुनक्के रात में पानी में भिगो दें और सुबह में बीज निकालने के बाद खूब चबा-चबाकर खाएं। 2-4 सप्ताह तक यह प्रयोग करने से ही ब्लड बढ़ जाता है और ब्लड को शुद्ध बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
25 किशमिश कच्चे दूध में डुबो दें और 30 मिनट के बाद यह दूध किशमिश सहित उबाल लें। इसके बाद पहले किशमिश खा लें, फिर ऊपर से गरम दूध पी लें। इस प्रयोग से ब्लड बढ़ता है और फ्रेश भी हो जाता है।
ब्लड और ब्लड के लाल कण कम होने पर पालक का रस 125 ग्राम की मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करने से पूरा लाभ मिलता है।
टमाटर ब्लड को हमेशा अम्लरहित बनाकर शुद्ध रखता है और प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। अतः टमाटर खाएं या इसका रस पिएं।
सेब, संतरा, चुकंदर, बथुआ, चौलाई, मेथी, मूली की पत्ती, अंगूर आदि का सेवन करें। ये अच्छे ब्लड फ्रेशनर हैं और ब्लड बढ़ाते भी हैं।
चुकंदर का रस आधा-आधा कप की मात्रा में दिन में तीन-चार बार पीने से ब्लड कैंसर में लाभ मिलता है और ब्लड शुद्ध भी हो जाता है।
गाजर का रस आधा-आधा गिलास की मात्रा में रोजाना सुबह नाश्ते से पहले और शाम में 4 बजे के करीब पिएं। इस प्रयोग से 15-20 दिनों में ही ब्लड फ्रेश हो जाता है।
अंगूर का रस पिएं, यह हीमोग्लोबिन बढ़ाता है और ब्लड को फ्रेश भी रखता है।
1 माह तक रोजाना खाली पेट लहसुन की कलियों को पानी के साथ निगलें, इससे ब्लड फ्रेश हो जाता है।
हरे गेहूं की बाली का रस रोजाना 1-1 चम्मच की मात्रा में सेवन करने से ब्लड फ्रेश होकर रंगत में निखार आता है।
गेहूं के छोटे पौधे (ज्वारे) का रस आधा-आधा कप की मात्रा में रोजाना पीने से ब्लड फ्रेश होता है।
ब्लड को शुद्ध रखने के लिए बासी भोजन, फ्रीज में रखे भोज्य – पदार्थ, मिर्च-मसालेदार पदार्थ, देर से – हजम होने वाले पदार्थ आदि न खाएं तथा वायु बनाने वाले पदार्थों-छोले, मटर, भिंडी, गोभी, आलू आदि का सेवन कम मात्रा में ही करें।
*डॉ अर्चना दुबे*, अध्यक्ष
अखंड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेंनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज
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*अर्चना दुबे एक्यूप्रेशर*
*अर्चना दुबे हेल्थ लैब*

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