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वैदिक हिन्दू नववर्ष: नव आरंभ, प्रकृति और आध्यात्मिकता का संगम – डॉ. नवीन योगी

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। संकल्प योग वेलनेस सेंटर के निदेशक डॉ. नवीन योगी ने वैदिक हिन्दू नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम है। यह नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है, जिसे सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना का दिन भी माना जाता है।
डॉ. योगी ने बताया कि वैदिक हिन्दू नववर्ष नव आरंभ का प्रतीक है। यह व्यक्ति को अपने जीवन में नई ऊर्जा, नए संकल्प और सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है। इस दिन लोग पुराने नकारात्मक विचारों को त्यागकर एक नई दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।
उन्होंने कहा कि यह नववर्ष प्राकृतिक चक्र से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। चैत्र मास में वसंत ऋतु का आगमन होता है, जब प्रकृति अपने नव रूप में खिल उठती है। पेड़ों पर नई पत्तियां, फूलों की सुगंध और वातावरण में ताजगी जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है। यह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का संदेश भी देता है।
धार्मिक दृष्टिकोण से भी इस नववर्ष का विशेष महत्व है। इस दिन लोग पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह समय आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
डॉ. नवीन योगी ने आगे कहा कि वैदिक हिन्दू नववर्ष सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, परिवार और समाज के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं, जिससे आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
अंत में उन्होंने कहा कि वैदिक हिन्दू नववर्ष हमें यह संदेश देता है कि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकते हैं। यह पर्व हमें न केवल नए वर्ष का स्वागत करना सिखाता है, बल्कि जीवन को एक नई दिशा देने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।

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