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संगीतमयी श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा का भव्य समापन, विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

सतना से उमेश कुशवाहा
कारीगोही। हनुमान चौक, कारीगोही में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा का सात दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भव्य रूप से सम्पन्न हो गया। सप्ताह भर चले इस धार्मिक महोत्सव ने पूरे ग्राम सहित आसपास के क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। ग्रामवासियों के समर्पित सहयोग तथा कार्यक्रम के संरक्षक समाजसेवी श्री गुलाब शुक्ला के मार्गदर्शन में कथा का आयोजन सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। कथा का शुभारंभ प्रथम दिवस 108 कलशों की भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। मातृशक्ति ने सिर पर कलश धारण कर पूरे गांव में मंगल यात्रा निकाली। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों, हरिनाम संकीर्तन और जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरे गांव में उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। दूसरे से पांचवें दिवस तक कथा व्यास द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण के विविध प्रसंगों का भावपूर्ण एवं संगीतमयी वर्णन किया गया। ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, गोवर्धन लीला और वामन अवतार सहित अनेक दिव्य कथाओं का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रतिदिन भजन-कीर्तन और आरती से पंडाल भक्तिरस में डूबा रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित होते रहे। षष्ठ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी एवं बारात का आकर्षक आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव-पार्वती विवाह का दिव्य मंचन भी श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। “हर-हर महादेव” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। समापन दिवस पर सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। सुदामा चरित्र ने सच्ची मित्रता, त्याग और निष्काम भक्ति का संदेश दिया, वहीं परीक्षित मोक्ष प्रसंग ने जीवन की नश्वरता और भगवान की भक्ति के महत्व को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया। कथा उपरांत हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति सम्पन्न हुई, जिसके साथ सप्ताह भर चले आयोजन का विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के संरक्षक श्री गुलाब शुक्ला द्वारा ग्राम कारीगोही के छह आदरणीय बुजुर्गों को श्रीफल एवं शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। उनके जीवन अनुभव, संस्कार और समाज के प्रति योगदान को प्रेरणास्रोत बताते हुए अभिनंदन किया गया। साथ ही कथा के पूज्य व्यासजी, पुजारीगण, भागवत श्रोताओं एवं आयोजन समिति के सदस्यों का भी सम्मान किया गया। कथा समापन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें कारीगोही सहित आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। भंडारे की व्यवस्था ग्रामवासियों के सहयोग से सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुई। युवाओं, मातृशक्ति एवं वरिष्ठजनों ने तन-मन-धन से सहयोग प्रदान कर आयोजन को सफल बनाया। सप्ताह भर चले इस पावन आयोजन ने कारीगोही गांव को भक्ति, एकता और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत स्वरूप प्रदान किया तथा समाज में श्रद्धा, सद्भाव और संस्कारों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।

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