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बसंत पंचमी: ज्ञान, प्रकृति और नवचेतना का पर्व – डॉ नवीन सिंह 

‎बस्ती से वेदान्त सिंह

 

‎बस्ती। संकल्प योग वैलनेस सेंटर बस्ती के निदेशक प्रोफेसर डॉ नवीन सिंह ने बताया कि भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और पावन पर्व बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, जब शीत ऋतु का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और प्रकृति नवजीवन से भर उठती है। खेतों में सरसों के पीले फूल, पेड़ों पर नई कोपलें और वातावरण में उत्साह बसंत ऋतु के आगमन का संदेश देते हैं।

‎बसंत पंचमी का विशेष संबंध विद्या की देवी माँ सरस्वती की उपासना से है। देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, वाणी, कला और संगीत की अधिष्ठात्री माना गया है। इस अवसर पर विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और घरों में सरस्वती पूजन किया जाता है। विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार और साधक विद्या, विवेक और सृजनात्मक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए देवी की आराधना करते हैं। भारतीय परंपरा में इस दिन बच्चों के विद्यारंभ संस्कार की भी विशेष मान्यता रही है।

‎डॉ नवीनसिंह ने बताया कि स्वास्थ्य और योग के दृष्टिकोण से भी बसंत पंचमी का अपना महत्व है। ऋतु परिवर्तन के समय शरीर और मन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है। बसंत ऋतु में प्राणशक्ति का संचार बढ़ता है, जिससे योग, प्राणायाम और ध्यान के अभ्यास से मानसिक एकाग्रता, सकारात्मक सोच और शारीरिक स्फूर्ति में वृद्धि होती है। पीले रंग का प्रयोग—जैसे पीले वस्त्र और हल्का, सुपाच्य भोजन—मन को प्रसन्न और ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

‎बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में आशा, नवसृजन और चेतना के जागरण का प्रतीक है। यह पर्व हमें ज्ञान के सम्मान, प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलित जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है।

‎— प्रो. डॉ. नवीन सिंह

‎निदेशक

‎संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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