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आगमपुर चकमार्ग विवाद: प्रशासनिक उदासीनता या दबंगों को संरक्षण?

 

रिपोर्ट: डॉक्टर संजय कुमार पांडेय,स्टेट हेड, उत्तर प्रदेश

मोबाइल: 7376326175

लखीमपुर खीरी।

तहसील शाहाबाद के ग्राम आगमपुर का मामला प्रशासनिक उदासीनता और कथित मिलीभगत का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है। यहां एसडीएम के आदेश, डीएम स्तर के निर्देश और यहां तक कि लोकायुक्त में की गई शिकायतें भी दबंगों के सामने बेअसर साबित होती नजर आ रही हैं।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार चकमार्ग संख्या 581 (रकबा 0.0790 हेक्टेयर) को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। इस मार्ग से संबंधित सीमांकन, मिट्टी हटाने और कब्जा मुक्त कराने के लिए कई बार आदेश जारी किए जा चुके हैं। तहसीलदार शाहाबाद द्वारा 19 अगस्त 2025 को जारी पत्र में भी स्पष्ट उल्लेख है कि क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा सीमांकन कर निशानदेही की जा चुकी है, इसके बावजूद मौके पर आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दस्तावेज यह भी बताते हैं कि मिट्टी डालने और हटाने के कार्य को लेकर राजस्व विभाग और विकास खंड प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे हैं। कभी इसे विकास विभाग का कार्य बताया गया तो कभी राजस्व विभाग अपनी भूमिका से किनारा करता नजर आया। नतीजा यह हुआ कि आदेश फाइलों में ही दबे रह गए और जमीन पर दबंगों का कब्जा और मजबूत होता चला गया।

सबसे गंभीर बात यह है कि लोकायुक्त स्तर तक शिकायत, जांच आख्या और बयान मौजूद होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रभावशाली कब्जेदारों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?

इसी विवादित भूमि पर राजकीय माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर उमेश कुशवाह द्वारा कराई जा रही बाउंड्री भी पूरी तरह अवैध बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एसडीएम और डीएम के आदेशों का भी पालन नहीं होगा, तो आम नागरिक आखिर न्याय की उम्मीद किससे करें?

पीड़ित पक्ष लगातार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है और उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।

Viyasmani Tripaathi

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