रिपोर्ट: डॉ. संजय कुमार पांडेय,स्टेट हेड, उत्तर प्रदेश
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लखीमपुर खीरी।
तहसील शाहाबाद के ग्राम आगमपुर का मामला प्रशासनिक उदासीनता और कथित मिलीभगत का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। यहां हालात ऐसे हैं कि एसडीएम के आदेश, डीएम स्तर के निर्देश और यहां तक कि लोकायुक्त में की गई शिकायतें भी दबंगों के सामने बेअसर साबित हो रही हैं।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, चकमार्ग संख्या 581 (रकबा 0.0790 हेक्टेयर) से जुड़ा यह विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है। पीड़ित पक्ष लगातार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है और उन्हें धमकाया भी जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।
तहसीलदार शाहाबाद द्वारा 19 अगस्त 2025 को जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा सीमांकन कर निशानदेही की जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक न तो मिट्टी हटाई गई और न ही चकमार्ग को कब्जा मुक्त कराया गया। स्थिति जस की तस बनी हुई है।
दस्तावेज यह भी दर्शाते हैं कि मिट्टी डालने और हटाने के कार्य को लेकर राजस्व विभाग और विकास खंड प्रशासन के बीच लंबे समय से जिम्मेदारी टालने का खेल चल रहा है। कभी इसे विकास विभाग का कार्य बताया जाता है तो कभी राजस्व विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। नतीजतन आदेश सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गए और जमीन पर दबंगों का कब्जा और मजबूत होता चला गया।
सबसे गंभीर बात यह है कि लोकायुक्त स्तर तक शिकायतें, जांच आख्या और बयान मौजूद होने के बावजूद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रभावशाली कब्जेदारों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?
इसी चकमार्ग की भूमि पर राजकीय माध्यमिक विद्यालय के हेडमास्टर उमेश कुशवाह द्वारा कथित तौर पर अवैध तरीके से बाउंड्री कराई जा रही है, जो नियमों के खिलाफ बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एसडीएम और डीएम के आदेशों का ही पालन नहीं होगा, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद आखिर किससे करें?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक आंखें मूंदे रहता है और कब पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल पाता है।