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गैर जमानती एवं संज्ञेय अपराध है बाल विवाह

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
लूणकरणसर 2 जनवरी । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वाधान में शिव मंदिर धर्मार्थ संस्थान में एक दिवसीय जाजम आयोजित कर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम पर विस्तृत चर्चा की गई इस दौरान मुख्य वक्ता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल सदस्य श्रेयांस बैद ने कहा कि बाल विवाह को रोकने एवं इस प्रथा के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए 2006 में पारित किया गया था। यह कानून विशेष रूप से उन बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाया गया है जो शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बाल विवाह के लिए तैयार नहीं होते हैं
बाल विवाह गैर जमानती एवं संज्ञेय अपराध है ।
अधिनियम का उद्देश्य पर बोलते हुए तालुका विधिक सेवा समिति के राकेश जोशी ने कहा कि।बाल विवाह को कानूनी रूप से अवैध बनाना और बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है इस अधिनियम के तहत बाल विवाह में शामिल दोनों पक्षों (लड़की और लड़के) को कानूनी संरक्षण मिलता है। यदि कोई बाल विवाह होता है, तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।लड़की या लड़के को अदालत से अपनी शादी को रद्द करने का अधिकार है कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान है। इसमें लड़के और लड़की के माता-पिता, जो बाल विवाह में शामिल होते हैं, और शादी कराने वाले अपराधी को 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
सदस्य पुष्पेंद्र चौधरी ने कहा कि
बाल विवाह को अवैध माना जाता है इस अधिनियम के तहत, बाल विवाह के बाद, विवाह को रद्द करने की प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बालिका के हितों को प्राथमिकता देता है।
महिला अधिकारिता विभाग की प्रचेता ज्योति बिश्नोई ने कहा
इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना है, ताकि बाल विवाह जैसी प्रथाओं को खत्म किया जा सके और लड़कियों को शिक्षा, स्वावलंबन और बेहतर जीवन जीने का मौका मिले इसअधिनियम के लागू होने से कई राज्यों में बाल विवाह को रोकने में मदद मिली है इस दौरान उपखंड की महिलाएं एवं बालिकाएं उपस्थित रहीं ।

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