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चादर महोत्सव की तैयारियां जोरों पर

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
खरतर गच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराजा की निश्रा में चादर महोत्सव समिति की बैठक आयोजित की गई। मंगल प्रभात लोढ़ा की अध्यक्षता में मांडवला में आयोजित इस बैठक में चादर महोत्सव को भव्यातिभव्य रूप से मनाने हेतु चर्चा हुई, जिसमें मुख्य रुप से युवाओं के लिए कार्यक्रम, विराट स्तर पर भक्ति संध्या, दादा गुरुदेव के जीवन चरित्र पर नाटिकाएं आदि पर विचार विमर्श हुआ। गुरुवर मणिप्रभ सागर सूरीश्वर जी ने इस अवसर पर कहा कि जैसलमेर की गुरुदेव की चादर जैन धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली मानी जाती है, जिसे दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि से जोड़ा जाता है। यह चादर 136 साल पहले महामारी से बचाने के लिए पाटन से जैसलमेर लाई गई थी, जिसके स्पर्श से जल छिड़कने पर जैसलमेर की प्लेग की बीमारी दूर हुई थी। संयोजक संघवी तेजराज गुलेच्छा ने कहा कि आज भी गुरुदेव की चादर को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे चादर महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में लोग आकर अभिषेक और पूजा करते हैं, शांति और समाधि की कामना करते हैं, तथा इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्त्व को अनुभव करते हैं। वित्त संयोजक कुशलराज गुलेच्छा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के जैसलमेर चादर महोत्सव के वृहत् आयोजन में पदार्पण की विनती लेकर समिति के सदस्य पूरे भारतवर्ष का दौरा कर समस्त साधु साध्वी भगवन्तों के साथ संघों को भी चादर महोत्सव में पधारने की विनती की जा रही है। समिति के ललित डाकलिया ने बताया कि यह चादर महामारी के दौरान जीवन रक्षक साबित हुई थी, जिससे यह जैसलमेर के लिए एक चमत्कारी वस्तु बन गई। समस्त जैन अनुयायी इसे दादा गुरुदेव की शक्ति और कृपा का प्रतीक मानते हैं, जो पूरे विश्व में शांति और समाधि लाने की क्षमता रखती है। संक्षेप में, जैसलमेर की गुरुदेव की चादर सिर्फ एक वस्त्र नहीं, बल्कि जैसलमेर के इतिहास, जैन धर्म की आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का एक जीता-जागता प्रतीक है। बैठक में सह संयोजक पुरुषोत्तम सेठिया, महावीर मेहता आदि सदस्य उपस्थित थे।
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